नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) सुस्त रिफंड और बेहतर कॉरपोरेट कर संग्रह के कारण चालू वित्त वर्ष में 11 जनवरी तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह करीब 8.82 प्रतिशत बढ़कर 18.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
आयकर विभाग द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह 12.4 प्रतिशत बढ़कर 8.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, और व्यक्तियों और एचयूएफ सहित गैर-कॉर्पोरेट से कर 6.39 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9.30 लाख करोड़ रुपये हो गया।
1 अप्रैल से 11 जनवरी के बीच प्रतिभूति लेनदेन कर संग्रह 44,867 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक सपाट वृद्धि दर्ज करता है।
इस दौरान टैक्स रिफंड 17 फीसदी घटकर 3.12 लाख करोड़ रुपये रह गया।
चालू वित्त वर्ष की 11 जनवरी तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.14 प्रतिशत बढ़कर लगभग 21.50 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसमें सकल कॉरपोरेट कर और गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह क्रमशः 10.47 लाख करोड़ रुपये और 10.58 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रोहिंटन सिधवा ने कहा कि शुद्ध संग्रह में 9 प्रतिशत की वृद्धि उत्साहजनक है और यह संकेत देता है कि सरकार साल के अंत में लक्ष्य हासिल करने की राह पर है। हालांकि, यह कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत करदाताओं दोनों को जारी किए जाने वाले कम रिफंड के कारण है।
सिधवा ने कहा, “रिफंड पर रुझान पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण रूप से अलग क्यों हो रहा है, इसका सटीक विवरण बहुत स्पष्ट नहीं है।
चालू वित्त वर्ष (2025-26) में सरकार ने अपने प्रत्यक्ष कर संग्रह का अनुमान 25.20 लाख करोड़ रुपये लगाया है, जो साल-दर-साल 12.7 प्रतिशत अधिक है।
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 26 में एसटीटी से 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का है। पीटीआई जेडी बाल बाल
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