मॉस्को, 22 सितंबर (पीटीआई) सोमवार को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में भारत के साथ हुए 5.43 अरब डॉलर के सौदे के तहत, रूस अगले साल एस-400 ट्रायम्फ (ट्रायम्फ) वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति पूरी कर लेगा।
सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने एक रक्षा सूत्र के हवाले से बताया, “रूस 2026 में भारत को पाँच एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति का अनुबंध पूरा करेगा। इनमें से चार प्रणालियाँ अब तक वितरित की जा चुकी हैं, और पाँचवीं अगले साल वितरित की जाएगी।”
पहले की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 5.43 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपये) के इस सौदे पर औपचारिक रूप से 5 अक्टूबर, 2018 को अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे को नज़रअंदाज़ करते हुए हस्ताक्षर किए गए थे।
मार्च 2021 में, अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने भारत द्वारा रूस की एस-400 वायु मिसाइल प्रणाली की खरीद की योजना पर चर्चा की और चेतावनी दी कि एस-400 की खरीद से CAATSA प्रतिबंध लग सकते हैं।
अब तक, अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने पहले कार्यकाल में हस्ताक्षरित प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला करने संबंधी अधिनियम को लागू नहीं किया है क्योंकि एस-400 सौदा औपचारिक रूप से पूरा नहीं हुआ है।
मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 वायु रक्षा मिसाइलें बहुत प्रभावी साबित हुईं, यह बात केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के रूप में रेड स्क्वायर पर वैलेंटाइन डे परेड में शामिल होने के लिए मॉस्को की अपनी यात्रा के दौरान स्थानीय भारतीय समुदाय को बताई थी।
सेठ ने कहा कि भारत ने और अधिक मिसाइल प्रणालियाँ खरीदने में रुचि दिखाई है और वह अपनी उन्नत एस-500 मिसाइल प्रणालियाँ प्राप्त करने की संभावना तलाश रहा है।
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें 22 अप्रैल को पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया गया।
भारत और पाकिस्तान चार दिनों तक चले गहन सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुँचे। पीटीआई बनाम जीएसपी
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