रोल्स-रॉयस की भारत को ‘होम मार्केट’ बनाने की गहरी महत्वाकांक्षा: सीईओ तुफ़ान एर्गिनबिलगिक

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (पीटीआई) ब्रिटिश रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफ़ान एर्गिनबिलगिक ने बुधवार को कहा कि उनकी कंपनी की भारत को अपना “होम” मार्केट बनाने और भूमि, वायु तथा समुद्र डोमेन में अपनी तकनीकों के आधार पर रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने की “गहरी महत्वाकांक्षा” है।

एर्गिनबिलगिक, जो वर्तमान में यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मुंबई में हैं, की ये टिप्पणियाँ उस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हैं जब भारत अपनी अगली पीढ़ी के लड़ाकू जेट विमानों को शक्ति देने के लिए एक जेट इंजन के सह-विकास हेतु यूके के साथ साझेदारी करने पर विचार कर रहा है। रोल्स-रॉयस उन चुनिंदा वैश्विक कंपनियों में से है जो लड़ाकू जेट के लिए इंजन बनाती हैं।

यह जानकारी मिली है कि भारत यूके के साथ जेट इंजन कार्यक्रम को अंतिम रूप देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि यह सौदा पक्का हो जाता है, तो रोल्स-रॉयस के एक भारतीय इकाई के साथ हाथ मिलाने की उम्मीद है।

भारत को “विकसित भारत” और “आत्मनिर्भर” बनाने में साझेदारी

एर्गिनबिलगिक ने कहा, “हमारे पास रोल्स-रॉयस के लिए भारत को एक घर के रूप में विकसित करने की गहरी महत्वाकांक्षाएँ हैं, जो हमारी मजबूत और सफल साझेदारी पर आधारित हैं।”

उन्होंने कहा, “वायु, भूमि और समुद्र अनुप्रयोगों में हमारी प्रतिस्पर्धी रूप से लाभप्रद तकनीकें हमें देश में क्षमताएं सफलतापूर्वक बनाने और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती हैं, जो ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) की दिशा में भारत की प्रगति को तेज करेंगी।”

  1. यूके-भारत सहयोग: यूके और भारत को “स्वाभाविक भागीदार” बताते हुए रोल्स-रॉयस के सीईओ ने कहा कि दोनों राष्ट्र दोनों पक्षों के लोगों के लाभ के लिए ‘जीत-जीत’ सहयोग में काम कर रहे हैं।
  2. आत्मनिर्भरता: उन्होंने कहा, “हम ‘आत्मनिर्भर’ भारत की यात्रा में उसके भागीदार बनने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, जो आगे विकास को बढ़ावा देगा और महत्वपूर्ण उद्योगों में आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक उपस्थिति को प्रोत्साहित करेगा।”

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और कंपनी की योजनाएँ

यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने रोल्स-रॉयस को “ब्रिटिश उत्कृष्टता का प्रतीक” बताया।

रोल्स-रॉयस के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता हमारी ‘परिवर्तन की योजना’ (Plan for Change) का समर्थन करती है—जो देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, रोज़गार सृजित करेगी और यूके-भारत संबंधों को मजबूत करेगी।”

रोल्स-रॉयस ने एक बयान में कहा कि नागरिक उड्डयन, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में क्षमताओं का उसका अनूठा पोर्टफोलियो भारत में उसकी उपस्थिति और साझेदारी को बढ़ाने तथा आने वाले दशकों तक भारत को “शक्ति देने, सुरक्षा देने और जोड़ने” में सक्षम बनाएगा।

  1. भारत की महत्वाकांक्षाओं के साथ तालमेल: कंपनी ने कहा, “रोल्स-रॉयस की विशेषज्ञता रक्षा में आत्मनिर्भरता, ऊर्जा स्वतंत्रता और विश्व स्तरीय एआई बुनियादी ढांचे के निर्माण सहित कनेक्टिविटी में वृद्धि के लिए भारत की महत्वाकांक्षाओं के साथ तालमेल बिठाती है।”
  2. सप्लाई चेन का लक्ष्य: नौ दशक पुरानी विरासत वाली यह कंपनी 2030 तक भारत से अपनी सप्लाई चेन सोर्सिंग को कम से कम दोगुना करने के लक्ष्य के साथ रणनीतिक स्थानीय साझेदारी और प्रतिभा विकास के माध्यम से देश में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है।
  3. ग्लोबल सेंटर का विस्तार: रोल्स-रॉयस ने हाल ही में भारत में अपने नव-विस्तारित ग्लोबल कैपेबिलिटी एंड इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया, जो नागरिक एयरोस्पेस और रक्षा का समर्थन करने वाली डिजिटल क्षमताओं, एंटरप्राइज सेवाओं और इंजीनियरिंग टीमों का केंद्र है।

एर्गिनबिलगिक द्विपक्षीय बैठकों के अलावा देश में भागीदारों और ग्राहकों से भी मुलाकात करेंगे।

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