लखनऊ, 9 जनवरी (PTI) किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को बर्खास्त करने की सिफारिश की है, जिस पर उसकी एक सहकर्मी डॉक्टर ने यौन शोषण, धार्मिक रूपांतरण और ‘लव जिहाद’ के आरोप लगाए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मेडिकल यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि आरोपी जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमिजुद्दीन नाइक उर्फ रमिज मलिक, जो फिलहाल फरार है, को 22 दिसंबर को निलंबित कर परिसर में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “किसी भी हालत में वह विश्वविद्यालय का हिस्सा नहीं रहेगा।”
हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध प्रदर्शन थम नहीं पाए। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने कुलपति कार्यालय में जबरन प्रवेश किया और विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दरवाजों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और कुलपति के खिलाफ नारे लगाए। अधिकारियों ने बताया कि हंगामे के बाद कुलपति कार्यालय से चली गईं।
इस घटना के कारण डॉक्टरों की भर्ती के लिए चल रहे साक्षात्कार बाधित हो गए, जिससे कर्मचारी, विशेषज्ञ और अभ्यर्थियों को परिसर छोड़ना पड़ा।
कुलपति नित्यानंद ने बताया कि KGMU की सात सदस्यीय आंतरिक समिति, जिसे आरोपों की जांच के लिए गठित किया गया था, ने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सही पाया है और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।
रिपोर्ट के आधार पर KGMU प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को हटाने का प्रस्ताव महानिदेशालय चिकित्सा शिक्षा (DGME) को भेज दिया है। उन्होंने बताया कि DGME उसके जूनियर रेजिडेंसी प्रवेश को रद्द कराने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को पत्र लिखेगा।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी डॉक्टर समिति के सामने केवल एक बार पेश हुआ और उसने दावा किया कि शिकायतकर्ता के साथ उसका संबंध सहमति से था। उसने यह भी कहा कि वह विवाहित नहीं है।
हालांकि, समिति ने शिकायतकर्ता, डॉक्टरों, कर्मचारियों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को प्रमाणित पाया।
दक्षिणपंथी संगठनों के प्रदर्शन के दौरान आंतरिक समिति के कुछ सदस्यों को कथित तौर पर रोका गया, जिसके बाद ठाकुरगंज और चौक थानों की पुलिस को परिसर में भेजा गया। पुलिस हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी हंगामे की सूचना मिलने पर परिसर पहुंचीं और KGMU प्रशासन पर शिकायत पर उचित कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों को शोषण की जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।”
यादव ने आंतरिक समिति की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि “गवाहों पर अपने बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है,” और निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके घर पर संपत्ति कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया है। यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करता है तो कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि डॉ. रमिजुद्दीन नाइक ने अपनी शादी छिपाकर शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया, गर्भपात के लिए मजबूर किया, धमकाया और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला।
पुलिस के अनुसार, 22 दिसंबर को आरोपी के खिलाफ बलात्कार, आपराधिक धमकी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उप पुलिस आयुक्त विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी के माता-पिता को 5 जनवरी को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा, “पीलीभीत, शाहजहांपुर सहित कई जिलों और दिल्ली में तलाशी अभियान चलाए गए हैं। उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने उसे कथित तौर पर मदद पहुंचाई।”

