लोकसभा में परमाणु क्षेत्र और शिक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पेश

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Nov. 17, 2025, Union Education Minister Dharmendra Pradhan with Indian astronaut and fighter pilot Shubhanshu Shukla and other dignitaries during the launch of AI initiatives at the AI Impact Festival 2025, in New Delhi. (@dpradhanbjp/X via PTI Photo)(PTI11_17_2025_000397B)

नई दिल्ली, 15 दिसंबर (पीटीआई) — सरकार ने सोमवार को लोकसभा में तीन नए विधेयक पेश किए, जिनमें एक विधेयक नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से संबंधित है।

सोमवार को ही पेश किया गया विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वतंत्र और स्वशासी बनाने का प्रावधान करता है। इसमें मजबूत और पारदर्शी मान्यता प्रणाली (एक्रेडिटेशन) और स्वायत्तता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। यह विधेयक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेश किया।

सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) विधेयक नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने और दायित्व व्यवस्था में व्यापक बदलाव करने का प्रस्ताव करता है। इस विधेयक को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया। इसके तहत परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नाभिकीय क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त करने का प्रस्ताव है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह विधेयक नाभिकीय क्षति के लिए एक व्यावहारिक नागरिक दायित्व व्यवस्था प्रदान करता है और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक दर्जा देने का प्रावधान करता है।”

इसके अलावा, निरसन एवं संशोधन विधेयक, 2025 को विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया। इस विधेयक के तहत ऐसे 71 कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव है, जो अब अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। इनमें से 65 कानून मूल अधिनियमों में संशोधन से जुड़े हैं, जबकि छह मूल कानून हैं।

हालांकि, विपक्षी सांसद मनीष तिवारी, एन. के. प्रेमचंद्रन, सौगत रॉय और जोथिमणि ने इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक देर से प्रसारित किया गया, जिससे उन्हें मसौदे का अध्ययन करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

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