
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (पीटीआई) गुजरात के वलसाड में 36 किलोमीटर से अधिक और नवसारी में 24 किलोमीटर तटरेखा पर 1990 से 2022 के बीच अलग-अलग स्तर का कटाव हुआ है, सरकार ने बुधवार को संसद को बताया।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद धवल लक्ष्मणभाई पटेल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) के आकलन के अनुसार 62.78 किलोमीटर लंबी वलसाड तटरेखा में 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में उच्च कटाव, 3.24 किलोमीटर में मध्यम कटाव और 30.88 किलोमीटर में निम्न स्तर का कटाव दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि 40.88 किलोमीटर लंबी नवसारी तटरेखा में 3.86 किलोमीटर में उच्च कटाव, 4.6 किलोमीटर में मध्यम कटाव और 16.18 किलोमीटर में निम्न कटाव देखा गया।
एनसीसीआर की तटरेखा परिवर्तन वर्गीकरण के अनुसार उदवाड़ा के उत्तर का क्षेत्र उच्च कटाव क्षेत्र के रूप में चिन्हित है, जबकि भगाल तटीय क्षेत्र मध्यम कटाव श्रेणी में आता है — दोनों को कटाव-प्रवण या उच्च जोखिम क्षेत्र माना गया है।
गोवाड़ा, देहरी बीच, उमरगांव बीच, नरगोल, मालवन बीच, मारोली, कलगाम बरियावाड़ बीच, फांसा, उमरसाड़ी, तीथल और कोसांबा जैसे अन्य तटीय क्षेत्र निम्न कटाव श्रेणी में वर्गीकृत हैं।
एनसीसीआर ने तीथल क्षेत्र सहित पूरे तटरेखा का 32 वर्षों का दीर्घकालिक आकलन किया है, लेकिन किसी तटीय सुरक्षा उपाय की सिफारिश नहीं की है।
तटीय भूमि के कटाव का कारण प्राकृतिक और मानव-जनित कारकों का मिश्रण है, जिसमें समुद्र-स्तर में वृद्धि, अनियंत्रित रेत खनन और अवसंरचना परियोजनाएं, चक्रवाती गतिविधियों में वृद्धि तथा मैंग्रोव जैसे प्राकृतिक अवरोधों का क्षरण शामिल है।
