वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण से पहले राष्ट्रपति से की मुलाकात

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: Finance Minister Nirmala Sitharaman presents the 'Union Budget 2026-27' in the Lok Sabha, in New Delhi, Sunday, Feb. 1, 2026. (Sansad TV via PTI Photo)(PTI02_01_2026_000128B)

नई दिल्ली, 1 फरवरी (पीटीआई)

अपने लगातार नौवें बजट को पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।

स्थापित परंपरा के अनुसार, संसद के लिए रवाना होने से पहले वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से भेंट की। सीतारमण ने कर्तव्य भवन में अपने कार्यालय के सामने अपने बजट दल के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। वह तमिलनाडु की कांचीपुरम की मैजेंटा रंग की साड़ी पहने हुए थीं और उनके हाथ में राष्ट्रीय प्रतीक वाला लाल कवर में टैबलेट था। इस दौरान उनके साथ वित्त राज्य मंत्री और मंत्रालय के सभी छह सचिव मौजूद थे।

राष्ट्रपति भवन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,

“केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री और उनकी टीम को बजट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं।”

राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद के लिए रवाना होने से पहले सीतारमण को शुभ माने जाने वाले ‘दही-चीनी’ भी भेंट किए।

बैठक के बाद सीतारमण कैबिनेट बैठक के लिए रवाना हुईं, जिसमें वर्ष 2026-27 के बजट को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।

सीतारमण 2019 में शुरू की गई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बजट भाषण ‘बही-खाता’ में ही लेकर जा रही हैं, जब उन्होंने ब्रीफकेस की परंपरा को समाप्त किया था।

वित्त मंत्री अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी, जिसमें आर्थिक विकास की गति बनाए रखने, राजकोषीय अनुशासन कायम रखने और वैश्विक व्यापार तनावों—जिसमें अमेरिकी शुल्क (टैरिफ) भी शामिल हैं—से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सुधारों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

वर्ष 2027 (FY27) का बजट एक जटिल पृष्ठभूमि में आ रहा है। जहां घरेलू मांग बनी हुई है और महंगाई हाल के उच्च स्तर से कुछ कम हुई है, वहीं भू-राजनीतिक तनाव, जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा असमान मौद्रिक ढील जैसी वैश्विक अनिश्चितताएं आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही हैं। देश के भीतर सरकार पर उपभोग बढ़ाने, रोजगार सृजन तेज करने और पूंजीगत व्यय बढ़ाने का दबाव है, साथ ही राजकोषीय घाटे को कम करने की दिशा में भी आगे बढ़ना है।

पीटीआई टीम डीपी बीएएल बीएएल

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