वॉशिंगटन, 30 अक्टूबर (AP): H-1B वीज़ा फीस को 1 लाख अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के कुछ हफ्तों बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने विदेशियों के वर्क परमिट (EAD) की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन प्रणाली खत्म करने की घोषणा की है। इस कदम से बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों और कर्मचारियों पर असर पड़ेगा।
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने बुधवार को यह घोषणा की। विभाग का कहना है कि अब काम के परमिट बढ़ाने से पहले विदेशियों की सही तरीके से जांच-पड़ताल की जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 या उसके बाद EAD नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले विदेशियों को ऑटोमैटिक एक्सटेंशन नहीं मिलेगा।
USCIS के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा,
“संयुक्त राज्य में काम करना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। इसलिए उचित जांच के बाद ही रोजगार अनुमति बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा।”
इस निर्णय का असर इन पर पड़ेगा:
- H-1B वीज़ा धारकों के जीवनसाथी
- L और E वीज़ा धारकों के जीवनसाथी
- शरणार्थी (Refugee) और शरण (Asylee) स्थिति वाले विदेशी
DHS ने विदेशियों को समय पर आवेदन करने की सलाह देते हुए कहा कि EAD समाप्त होने से 180 दिन पहले आवेदन जमा करें।
DHS ने यह भी स्पष्ट किया कि 30 अक्टूबर 2025 से पहले जिनके वर्क परमिट अपने आप बढ़ चुके हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा।
बाइडेन प्रशासन के पुराने नियमों के तहत, समय पर आवेदन होने पर विदेशियों को 540 दिन की ऑटोमेटिक एक्सटेंशन मिलती थी।
डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर को H-1B वीज़ा फीस को 1 लाख डॉलर प्रति वर्ष करने का फैसला किया था।
US Census Bureau के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में अमेरिका में लगभग 48 लाख भारतीय मूल के लोग रह रहे थे, जिनमें से 66% प्रवासी और 34% अमेरिका में जन्मे थे।
PTI
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
SEO टैग्स: #स्वदेशी, #न्यूज़, विदेशियों के वर्क परमिट की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन खत्म: अमेरिका

