
नई दिल्ली, 16 फरवरी (पीटीआई) विश्व का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिखर सम्मेलन सोमवार को भरे हुए हॉल और लंबी कतारों के बीच शुरू हुआ। तकनीकी उद्योग के दिग्गज, उद्योगपति, नीति निर्माता, स्टार्टअप संस्थापक और तकनीकी विशेषज्ञ सम्मेलन स्थल पर उमड़ पड़े, जहां भारत एआई तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने और ‘ग्लोबल एआई कॉमन्स’ पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने की दिशा में पहल करने जा रहा है।
एआई इम्पैक्ट समिट में प्रतिनिधियों, वक्ताओं और मेहमानों के स्वागत में शहर भर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं। भारत मंडपम में सम्मेलन सुबह 09:30 बजे शुरू होने से काफी पहले ही लंबी कतारें देखी गईं, जो इस विषय और सम्मेलन के प्रति उत्साह को दर्शाती हैं।
उत्साह इस बात के बावजूद ऊंचा रहा कि उच्च-प्रोफाइल वक्ता – अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोडेई – अभी तक देश नहीं पहुंचे हैं। उनके सत्र बुधवार से शुरू होंगे।
शिखर सम्मेलन के अंतिम दो दिन – 19 और 20 फरवरी – को 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, जिनमें फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा शामिल हैं, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एआई के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
पीटीआई की टीम ने विभिन्न सत्रों वाले हॉल के बाहर लंबी कतारें देखीं। कुछ व्यवस्थागत चुनौतियां थीं, लेकिन सम्मेलन सुव्यवस्थित और संगठित रहा।
कई समानांतर सत्र एक साथ चल रहे हैं और सभी पूरी क्षमता तक भरे हुए हैं।
16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में 3,250 से अधिक वक्ता और 500 से अधिक सत्र होंगे।
एक प्रतिभागी ने कहा, “सत्र पूरी तरह भरे हुए हैं। लंबी कतारें हैं और हॉल भर जाने पर दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, जिससे बाहर इंतजार कर रहे लोगों को परेशानी होती है। किसी सत्र में शामिल होने के लिए पहले से पहुंचना पड़ता है।”
दूसरे प्रतिभागी ने कहा कि रोचक वक्ताओं की सूची भारी भीड़ आकर्षित कर रही है। “एआई को लेकर जबरदस्त उत्साह है।”
आयोजकों ने बताया कि पंजीकरण अपेक्षा से अधिक हुए हैं, जो एआई अवसंरचना, एंटरप्राइज अपनाने और स्वायत्त कंप्यूटिंग क्षमताओं में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
रोजगार के भविष्य, कौशल विकास, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई, एआई शासन और अवसंरचना, जनरेटिव एआई के उपयोग और सार्वजनिक क्षेत्र में एआई के उपयोग जैसे विषयों पर पैनल चर्चा में खड़े होकर सुनने की स्थिति रही। सत्रों के बीच प्रतिभागी नेटवर्किंग और विचारों के आदान-प्रदान के लिए गलियारों में जुटे दिखे।
सम्मेलन के साथ एक एक्सपो भी आयोजित किया गया है, जहां गूगल, एनवीडिया, अमेजन, मेटा, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट सहित घरेलू कंपनियां अपनी एआई नवाचार प्रदर्शित कर रही हैं। इस एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शनी और 13 देशों के पवेलियन शामिल हैं।
यह शिखर सम्मेलन भारत को अपनी तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर देता है, साथ ही वैश्विक दक्षिण के लिए एआई तक पहुंच लोकतांत्रिक बनाने का मंच भी प्रदान करता है। नई दिल्ली ‘ग्लोबल एआई कॉमन्स’ या प्रमुख क्षेत्रों में एआई उपयोग मामलों के साझा भंडार पर अंतरराष्ट्रीय सहमति की दिशा में भी प्रयास कर सकता है।
ब्रिटेन ने 2023 में पहला एआई शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें एआई सुरक्षा और जोखिमों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। 2025 में फ्रांस में हुए अगले संस्करण में बड़े निवेशों की घोषणा की गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह शिखर सम्मेलन देश की डिजिटल अवसंरचना और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर है, जिसने ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों को भारत में संचालन स्थापित करने के लिए आकर्षित किया है।
शिखर सम्मेलन से पहले पीटीआई को दिए साक्षात्कार में मोदी ने भारत को डिजिटल अवसंरचना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वैश्विक केंद्र बताया और कहा कि देश दुनिया के डेटा की मेजबानी और तकनीकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
यह सम्मेलन एआई तकनीकों तक पहुंच बढ़ाने, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने और जिम्मेदार एआई विकास के लिए साझा वैश्विक ढांचे पर सहमति बनाने पर केंद्रित रहेगा। भारत उभरती तकनीकों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एआई के लोकतंत्रीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
