
वॉशिंगटन, 4 जनवरी (एपी) — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला के तेल उद्योग पर नियंत्रण लेने और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक छापेमारी में पकड़ने के बाद अमेरिकी कंपनियों से उसे पुनर्जीवित कराने की योजना से तेल कीमतों पर तात्कालिक रूप से बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
सालों की उपेक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला का तेल उद्योग बदहाल स्थिति में है। इसलिए उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने में वर्षों और भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी। हालांकि कुछ विश्लेषक आशावादी हैं कि वेनेजुएला अपने मौजूदा करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन के उत्पादन को अपेक्षाकृत जल्दी दोगुना या तिगुना कर ऐतिहासिक स्तरों तक पहुंच सकता है।
गैसोलिन मूल्य ट्रैकर गैसबडी के प्रमुख पेट्रोलियम विश्लेषक पैट्रिक डी हान ने कहा, “हालांकि कई लोग रिपोर्ट कर रहे हैं कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वेनेजुएला का तेल ढांचा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, लेकिन यह कई वर्षों से जर्जर हो चुका है और इसे दोबारा खड़ा करने में समय लगेगा।”
अमेरिकी तेल कंपनियां तब तक बड़े पैमाने पर निवेश नहीं करेंगी, जब तक देश में एक स्थिर शासन स्थापित नहीं होता। शनिवार को भी राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी रही—ट्रंप ने कहा कि अमेरिका देश का संचालन कर रहा है, जबकि मौजूदा वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति ने (सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राष्ट्रपति बनाए जाने से पहले) तर्क दिया कि मादुरो को सत्ता में बहाल किया जाना चाहिए।
प्राइस फ्यूचर्स ग्रुप के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक फिल फ्लिन ने कहा, “लेकिन अगर ऐसा लगता है कि अमेरिका अगले 24 घंटों तक देश को सफलतापूर्वक चला रहा है, तो यह उम्मीद बढ़ेगी कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां अपेक्षाकृत जल्दी वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित कर सकती हैं।”
फ्लिन के मुताबिक, अगर वेनेजुएला एक बड़े तेल उत्पादक के रूप में उभरता है, तो इससे “लंबी अवधि में कीमतें नीचे रहने में मदद मिल सकती है” और रूस पर दबाव बढ़ेगा।
तेल का कारोबार सप्ताहांत में नहीं होता, इसलिए कीमतों पर तत्काल असर नहीं दिखा। बाजार खुलने पर भी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। वेनेजुएला ओपेक का सदस्य है, इसलिए उसका उत्पादन पहले से ही इसमें शामिल है, और वैश्विक बाजार में फिलहाल तेल की आपूर्ति अधिक है।
प्रमाणित भंडार
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है—करीब 303 अरब बैरल, जो वैश्विक भंडार का लगभग 17 प्रतिशत है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों की वेनेजुएला में रुचि स्वाभाविक है। एक्सॉन मोबिल और शेवरॉन सहित प्रमुख कंपनियों ने शनिवार को टिप्पणी के अनुरोधों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। कोनोकोफिलिप्स के प्रवक्ता डेनिस नुस ने ईमेल में कहा कि कंपनी “वेनेजुएला में घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व स्थिरता पर उनके संभावित प्रभावों की निगरानी कर रही है। भविष्य की किसी भी कारोबारी गतिविधि या निवेश पर अटकल लगाना अभी जल्दबाजी होगी।”
शेवरॉन ही एकमात्र कंपनी है जिसकी वेनेजुएला में महत्वपूर्ण गतिविधियां हैं—वह वहां करीब 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन करती है। शेवरॉन ने 1920 के दशक में वेनेजुएला में निवेश शुरू किया था और वह राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला एसए (पीडीवीएसए) के साथ संयुक्त उपक्रमों के जरिए काम करती है।
इतने विशाल भंडार के बावजूद, वेनेजुएला दुनिया की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का एक प्रतिशत से भी कम उत्पादन कर रहा है। भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के चलते 1999 में 35 लाख बैरल प्रतिदिन से उत्पादन गिरकर आज के स्तर पर आ गया।
समस्या तेल खोजने की नहीं है, बल्कि राजनीतिक माहौल की है—क्या कंपनियां सरकार पर अपने अनुबंधों का सम्मान करने के लिए भरोसा कर सकती हैं? 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिससे एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों को बाहर होना पड़ा।
राइस यूनिवर्सिटी में लैटिन अमेरिकी ऊर्जा कार्यक्रम के निदेशक फ्रांसिस्को मोनाल्डी ने कहा, “मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि बुनियादी ढांचा खराब है, बल्कि यह भी है कि विदेशी कंपनियां राजनीतिक स्थिरता और अनुबंधों की स्पष्टता के बिना पैसा लगाने को कैसे तैयार हों।”
बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत है।
मोनाल्डी के अनुसार, “वेनेजुएला को एक मिलियन बैरल प्रतिदिन से चार मिलियन बैरल तक ले जाने के लिए करीब एक दशक और लगभग 100 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।”
मजबूत मांग
वेनेजुएला भारी कच्चा तेल पैदा करता है, जिसकी जरूरत डीजल, डामर और भारी उपकरणों के ईंधन के लिए होती है। वेनेजुएला और रूस पर प्रतिबंधों तथा अमेरिका के हल्के कच्चे तेल के सीमित विकल्प होने के कारण दुनिया भर में डीजल की कमी है।
अतीत में, अमेरिका के खाड़ी तट के रिफाइनरियों को भारी कच्चे तेल के अनुरूप बनाया गया था, जब अमेरिकी उत्पादन गिर रहा था और वेनेजुएला व मेक्सिको का तेल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। इसलिए रिफाइनरियां वेनेजुएला के कच्चे तेल तक बेहतर पहुंच चाहेंगी—यह उन्हें अधिक कुशलता से काम करने में मदद करता है और आमतौर पर थोड़ा सस्ता भी होता है।
वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ने से रूस पर दबाव डालना भी आसान हो सकता है, क्योंकि यूरोप और अन्य देश रूस से खरीदने के बजाय वेनेजुएला से डीजल और भारी तेल ले सकेंगे।
फ्लिन ने कहा, “रूस को वेनेजुएला के तेल उद्योग के पतन से बड़ा फायदा हुआ है, क्योंकि वे वैश्विक बाजार में उसी तरह के तेल के प्रतिस्पर्धी थे।”
जटिल कानूनी स्थिति
हालांकि, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कानून प्रोफेसर और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी मैथ्यू वैक्समैन ने कहा कि वेनेजुएला के संसाधनों पर नियंत्रण करने से गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने ईमेल में लिखा, “उदाहरण के तौर पर बड़ा सवाल यह होगा कि वास्तव में वेनेजुएला के तेल का मालिक कौन है? कोई भी कब्जा जमाने वाली सैन्य शक्ति दूसरे देश के संसाधनों को लेकर खुद को समृद्ध नहीं कर सकती, लेकिन ट्रंप प्रशासन संभवतः यह दावा करेगा कि वेनेजुएला सरकार ने कभी वैध रूप से उन पर अधिकार नहीं रखा।”
वैक्समैन—जो जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन में विदेश और रक्षा विभागों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में रहे—ने यह भी जोड़ा कि “हमने इस प्रशासन को वेनेजुएला के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर काफी उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाते देखा है।”
