
वॉशिंगटन, 28 जनवरी (एपी) अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी सांसदों को ग्रीनलैंड, नाटो, ईरान और चीन को लेकर ट्रंप प्रशासन के रुख के बारे में भी जानकारी दी।
सीनेट की विदेश संबंध समिति में सुनवाई के दौरान, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने प्रशासन की विदेश नीति को लेकर अलग-अलग आकलन पेश किए। इस बीच, रुबियो ने ट्रंप की मंशाओं और उनकी आक्रामक बयानबाजी पर सफाई दी, जिसने यूरोप सहित कई अमेरिकी सहयोगियों को चिंतित किया है—खासतौर पर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग को लेकर।
3 जनवरी को मादुरो को अपदस्थ करने के लिए हुई कार्रवाई के बाद पहली सार्वजनिक सुनवाई में रुबियो ने कहा कि ट्रंप ने पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे को खत्म करने के लिए कदम उठाया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से अमेरिका पहले से अधिक सुरक्षित हुआ है और प्रशासन वेनेजुएला को स्थिर करने के लिए अंतरिम अधिकारियों के साथ काम करेगा।
रुबियो ने कहा, “यह काम रातों-रात पूरा नहीं होगा, लेकिन हम अच्छी और ठोस प्रगति कर रहे हैं। आज वेनेजुएला की स्थिति चार हफ्ते पहले से बेहतर है और हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में यह और बेहतर होगी।” हालांकि, उन्होंने सुनवाई के लिए तैयार किए गए उस बयान से दूरी बना ली जिसमें कहा गया था कि अगर नई नेतृत्व टीम ने ट्रंप की मांगें पूरी नहीं कीं तो अमेरिका आगे सैन्य कार्रवाई से नहीं हिचकेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि फिलहाल वेनेजुएला में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की न तो तैयारी है और न ही ऐसी कोई मंशा।” रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला को जल्द ही प्रतिबंधों के तहत रोकी गई तेल बिक्री की अनुमति दी जाएगी और उससे मिलने वाला राजस्व पुलिसिंग और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सरकारी जरूरतों पर खर्च होगा। यह धन अमेरिकी ट्रेजरी के नियंत्रण वाले खाते में जमा होगा और मासिक बजट की मंजूरी के बाद जारी किया जाएगा।
जहां अधिकांश रिपब्लिकन सांसदों ने इस कार्रवाई की सराहना की, वहीं डेमोक्रेट सांसदों ने गहरी शंका जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि वेनेजुएला में ट्रंप की नीति कहीं चीन को ताइवान और रूस को यूक्रेन में आक्रामक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित तो नहीं कर रही, और नाटो सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड लेने की धमकी से गठबंधन कमजोर तो नहीं हो रहा।
रुबियो ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि नाटो में ग्रीनलैंड को लेकर मचा हंगामा अब शांत हो रहा है और बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम कुछ सकारात्मक हासिल करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो को लेकर ट्रंप की आलोचना नई नहीं है, बस वह इसे ज्यादा मुखर होकर कहते हैं, और सदस्य देशों को अपने रक्षा बजट बढ़ाने की जरूरत है।
ताइवान पर चीन के रुख को लेकर रुबियो ने कहा कि यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दीर्घकालिक परियोजना है और दुनिया में कहीं भी होने वाली घटनाओं से यह प्रभावित नहीं होगी। ईरान के संदर्भ में, जहां ट्रंप ने फिर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है, रुबियो ने कहा कि फिलहाल हमला करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने माना कि तेहरान में सत्ता परिवर्तन मादुरो को हटाने की तुलना में कहीं अधिक जटिल होगा।
रिपब्लिकन समिति अध्यक्ष, इडाहो के सीनेटर जिम रिश ने बताया कि वेनेजुएला की राजधानी में हुई सैन्य कार्रवाई में “करीब 200 सैनिक” शामिल थे और “27 मिनट से भी कम समय तक गोलीबारी” हुई। उन्होंने इसे “संक्षिप्त, लक्षित और सफल” बताया। वहीं, डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन ने सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई वाकई उचित थी, क्योंकि मादुरो के कई करीबी अब भी सत्ता में हैं और देश की आर्थिक हालत खराब बनी हुई है।
रुबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका का अंतिम लक्ष्य वेनेजुएला में वैध और लोकतांत्रिक चुनाव कराना है। सुनवाई के बाद उन्होंने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो से मुलाकात भी की। उन्होंने बताया कि अमेरिका कराकास में अपने दूतावास को फिर से खोलने की तैयारी के तहत अतिरिक्त कूटनीतिक कर्मियों को भेजने की योजना बना रहा है, हालांकि संबंधों का पूर्ण सामान्यीकरण अभी बाकी है। (एपी)
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