वैश्विक अधिकार समूहों ने हसीना के मुकदमे की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

Dhaka: Security personnel keep vigil outside the International Crimes Tribunal after it sentences ousted former Prime Minister Sheikh Hasina to death in absentia for crimes against humanity, in Dhaka, Bangladesh, Monday, Nov. 17, 2025. (PTI Photo)(PTI11_17_2025_000465B)

नई दिल्ली, 18 नवंबर (PTI) — अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक थिंक-टैंकों ने बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अनुपस्थिति में सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

78 वर्षीय हसीना को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्राइब्यूनल (ICT-BD) ने सोमवार को 2024 में उनकी सरकार द्वारा छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई से जुड़े “मानवता के खिलाफ अपराधों” के लिए दोषी ठहराया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फैसले को “न तो निष्पक्ष और न ही न्यायसंगत” करार देते हुए कहा कि मुकदमे की अभूतपूर्व तेजी और हसीना की अनुपस्थिति ने न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर किया है। संगठन ने कहा कि हालांकि उनके लिए एक कोर्ट-नियुक्त वकील मौजूद था, लेकिन बचाव पक्ष को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और विरोधाभासी सबूतों की जिरह करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया। एमनेस्टी ने ट्राइब्यूनल की स्वतंत्रता और प्रक्रियात्मक कमियों पर भी सवाल उठाए।

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निष्पक्ष मुकदमे की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा। HRW के अनुसार, मुख्य साक्ष्यों में ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थीं, जिनमें कथित तौर पर हसीना द्वारा बल प्रयोग के आदेश का संकेत मिलता है, लेकिन बचाव पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। संगठन ने मृत्युदंड का भी विरोध दोहराते हुए इसे “स्वभाव से ही क्रूर और अपूरणीय” बताया।

HRW ने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेश में — चाहे हसीना का शासन रहा हो या वर्तमान में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार — ICT-BD का उपयोग राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ “राजनीतिक रूप से प्रेरित” मामलों में होता रहा है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (ICG) ने भी कार्यवाही की वैधता पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि अनुपस्थिति में होने वाले मुकदमे वैसे ही विवादास्पद माने जाते हैं। संगठन ने सुनवाई की तेज़ रफ्तार और बचाव पक्ष को सीमित संसाधन उपलब्ध कराए जाने को बड़ी चिंताएं बताया। (PTI)

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