
दावोस, 23 जनवरी (PTI) विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के समापन के साथ ही उद्योग संगठन CII ने शुक्रवार को कहा कि भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच हुई चर्चाओं में भारत को दीर्घकालिक और भरोसेमंद विकास के एक मजबूत आधार के रूप में देखा गया।
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने PTI से कहा कि दावोस का माहौल “सतर्क आशावाद” और “रणनीतिक फोकस” से भरा हुआ था।
उन्होंने कहा, “भू-राजनीति ने स्पष्ट रूप से पृष्ठभूमि तय की, लेकिन इसने आर्थिक एजेंडे को पीछे नहीं धकेला, बल्कि उसे और धार दी। नेताओं और निवेशकों ने इस अवसर का उपयोग आपूर्ति शृंखला की मजबूती, व्यापार विविधीकरण और ऐसे देशों में पूंजी आवंटन पर पुनर्विचार के लिए किया, जो स्थिरता, पैमाना और नीतिगत पूर्वानुमेयता प्रदान करते हैं।”
इसी संदर्भ में, बनर्जी ने कहा कि भारत को उसकी व्यापक आर्थिक स्थिरता, बड़े घरेलू बाजार और निरंतर सुधारों की गति के कारण एक विश्वसनीय दीर्घकालिक विकास आधार के रूप में बार-बार उद्धृत किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष दावोस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सबसे प्रमुख विषयों में से एक के रूप में उभरी, जो लगभग हर क्षेत्र और नीति चर्चा में केंद्र में रही।
उन्होंने कहा, “इस परिप्रेक्ष्य में भारत को इस AI परिवर्तन बिंदु का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में माना जा रहा है, क्योंकि यहां एक बड़ा और डिजिटल रूप से सक्षम बाजार, दुनिया के सबसे बड़े STEM प्रतिभा भंडारों में से एक, तेजी से बढ़ता डेटा इकोसिस्टम और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूत नींव मौजूद है।”
बनर्जी ने कहा कि भारत ने जिम्मेदार और समावेशी AI पर वैश्विक संवाद में एक सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में खुद को स्थापित किया है और इंटरऑपरेबल मानकों, भरोसेमंद डेटा प्रवाह तथा ऐसे नवाचार साझेदारियों की वकालत की है, जो डिजिटल संप्रभुता के साथ खुलेपन का संतुलन बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि यह साझा समझ बन रही है कि AI अब केवल एक सीमांत तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह मुख्य आर्थिक अवसंरचना बनती जा रही है, जो आने वाले दशक में प्रतिस्पर्धा, निवेश निर्णयों और राष्ट्रीय विकास रणनीतियों को आकार देगी।
बनर्जी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारत ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है, लेकिन इस गति को बनाए रखने के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं को और स्पष्ट करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति-पक्ष से जुड़ी बाधाएं लगातार बढ़ने की आशंका है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अब अस्थायी न होकर संरचनात्मक होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर, वे वस्तुएं जिनकी आपूर्ति अत्यधिक केंद्रित है और जिनका अल्पकालिक विकल्प सीमित है — चाहे खाद्य पदार्थ हों या औद्योगिक इनपुट — सबसे अधिक असुरक्षित हैं।”
उन्होंने कहा कि यह वैश्विक और भारतीय आपूर्ति शृंखलाओं में विविधीकरण, क्षेत्रीयकरण और लचीलापन बढ़ाने के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। PTI BJ BAL BAL
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