शिक्षा के निजीकरण से आदिवासी और ग्रामीण छात्रों का अधिकार छिन रहा है: मेधा पाटकर

Bhubaneswar: Social activist and environmentalist Medha Patkar addresses during state-level convention on protection of natural resources & conservation of rivers and water sources, in Bhubaneswar, Saturday, June 7, 2025. (PTI Photo) (PTI06_07_2025_000299B)

नांदेड़, 25 जनवरी (पीटीआई) सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शनिवार को शिक्षा के तेजी से हो रहे निजीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का शिक्षा का अधिकार छिन रहा है।

वह यहां नांदेड़ एजुकेशन सोसाइटी के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

पाटकर ने आरोप लगाया कि छात्रों की संख्या में कमी का हवाला देकर सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जबकि शिक्षा को संविधान के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।

उन्होंने कहा, “वर्तमान व्यवस्था शिक्षा को व्यवसायीकरण की ओर धकेल रही है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र अपने शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं।”

इस कार्यक्रम में स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोहर चस्कर भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं और आधुनिक पाठ्यक्रमों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।