संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेताया — ‘लापरवाह विघटन और मानवीय पीड़ा का युग’

Secretary General Antonio Guterres speaks during a high-profile meeting at the United Nations aimed at galvanizing support for a two-state solution to the Israeli-Palestinian conflict Monday, Sept. 22, 2025, at UN headquarters.AP/PTI(AP09_23_2025_000002B)

संयुक्त राष्ट्र, 23 सितम्बर (एपी) — वैश्विक शांति और प्रगति पर संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को विश्व नेताओं को चुनौती दी कि वे ऐसा भविष्य चुनें जहाँ कानून की सत्ता कच्ची ताक़त पर हावी हो और राष्ट्र स्वार्थ की होड़ में पड़ने के बजाय एकजुट हों।

गुटेरेस ने महासभा के वार्षिक सत्र के उद्घाटन पर अपने भाषण में कहा कि 80 साल पहले भी संयुक्त राष्ट्र के संस्थापकों के सामने ऐसे ही प्रश्न थे, लेकिन आज शांति या युद्ध, कानून या अराजकता, सहयोग या संघर्ष का चुनाव “और भी ज़्यादा तात्कालिक, परस्पर जुड़ा हुआ और कठोर” है।

उन्होंने कहा, “हम लापरवाह विघटन और लगातार मानवीय पीड़ा के युग में प्रवेश कर चुके हैं। दण्डमुक्ति, असमानता और उदासीनता के बोझ तले शांति और प्रगति के स्तंभ डगमगा रहे हैं।”

गुटेरेस ने नेताओं से पहला कर्तव्य शांति चुनने का बताया और बिना किसी देश का नाम लिए सूडान के युद्धरत पक्षों को समर्थन बंद करने की अपील की।

उन्होंने गाज़ा को लेकर भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि उनके लगभग नौ वर्षों के महासचिव कार्यकाल में इतनी भयावह तबाही और मौतें पहले कभी नहीं हुईं। उन्होंने दोहराया कि “फ़िलिस्तीनी जनता की सामूहिक सज़ा को कोई भी न्यायोचित नहीं ठहरा सकता।”

गुटेरेस ने दक्षिण अफ्रीका द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दाख़िल जनसंहार मामले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत के आदेशित अस्थायी उपायों को पूरी तरह और तुरंत लागू करना होगा। लेकिन जनवरी 2024 के आदेश के बाद गाज़ा में हत्याएं और भुखमरी और बढ़ गई हैं।

उन्होंने यह भी चेताया कि अमेरिका और अन्य देशों द्वारा फंडिंग रोकने या बकाया न चुकाने से संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि सहायता कटौती “कई लोगों के लिए मौत की सज़ा” जैसी है।

महासभा की “जनरल डिबेट” बैठक मंगलवार से शुरू हुई, जिसमें ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत कई नेता भाषण देंगे।

गाज़ा संघर्ष, फ़िलिस्तीन को मान्यता देने की बढ़ती वैश्विक मुहिम और बढ़ती गरीबी व जलवायु संकट इस वर्ष की चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

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