संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले कनाडा ने अन्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीन को मान्यता दी

टोरंटो, 21 सितम्बर (एपी) कनाडा ने रविवार को फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे दी, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया है। कनाडा को उम्मीद है कि यह फैसला दो राज्यों के शांतिपूर्वक साथ-साथ रहने पर आधारित शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घोषणा की कि कनाडा ने फिलिस्तीन को एक राज्य के रूप में मान्यता दे दी है। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने भी रविवार को इसी तरह का ऐलान किया।

कार्नी ने जुलाई के अंत में ही संकेत दिया था कि वे यह कदम उठाएंगे, क्योंकि कई पश्चिमी देश गाज़ा में बढ़ते युद्ध से गहराई से निराश हैं। यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा से ठीक पहले आया है, जहां अन्य देश, जिनमें ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस शामिल हैं, फिलिस्तीन को मान्यता देने की उम्मीद है।

पश्चिमी देशों द्वारा फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देने से इज़राइल और अमेरिका नाराज़ हैं। उनका कहना है कि यह मान्यता चरमपंथियों को बढ़ावा देती है और हमास को पुरस्कृत करती है, जिसने 7 अक्तूबर 2023 को दक्षिणी इज़राइल में हमला किया था और इसी से युद्ध शुरू हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कनाडा को धमकी दी थी कि यह घोषणा अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौता करना “बहुत कठिन” बना देगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस गर्मी में घोषणा की थी कि उनका देश सितम्बर में ऐसा करने वाला पहला प्रमुख पश्चिमी शक्ति होगा। इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की शुरुआत में सऊदी अरब के साथ सह-अध्यक्षता वाले एक सम्मेलन में मैक्रों फिलिस्तीन को मान्यता देने की औपचारिक घोषणा करेंगे।

पहले ही 145 से अधिक देश फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, जिनमें यूरोप के एक दर्जन से अधिक देश शामिल हैं।

कार्नी ने पहले कहा था कि कनाडा अन्य देशों के साथ मिलकर “दो-राज्य समाधान की संभावना बनाए रखने, और ज़मीन पर हो रही मौतों, बस्तियों और कब्ज़ों को इस हद तक बढ़ने से रोकने के लिए काम कर रहा है, जिससे समाधान असंभव हो जाए।” इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार दो-राज्य समाधान को खारिज करती है।

कनाडा लंबे समय से इज़राइल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के विचार का समर्थन करता रहा है, लेकिन उसने कहा था कि मान्यता एक बातचीत-आधारित दो-राज्य समाधान का हिस्सा होनी चाहिए।

गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 23 महीनों में इज़राइली बमबारी से 65,100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, पट्टी का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया है, करीब 90 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो गई है और एक विनाशकारी मानवीय संकट पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गाज़ा सिटी भुखमरी की स्थिति झेल रही है।

फिलहाल 48 बंधक गाज़ा में हैं, जिनमें से आधे से भी कम के जीवित होने की संभावना है। 7 अक्तूबर 2023 को हमास-नेतृत्व वाले आतंकियों ने दक्षिणी इज़राइल पर हमला कर लगभग 1,200 लोगों (ज्यादातर नागरिक) को मार डाला और 251 अन्य को अगवा कर लिया था। (एपी) जीएसपी

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