संयुक्त राष्ट्र, 20 अगस्त (पीटीआई) – भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा और 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में महिलाओं पर हुए “घृणित यौन अपराधों” की याद दिलाई। भारत ने कहा कि यह शर्मनाक पैटर्न आज भी “निर्दोष दंड से मुक्त होकर” जारी है।
भारतीय राजनयिक एल्डोस मैथ्यू पन्नूज़ (काउंसलर और कार्यवाहक प्रभारी) ने मंगलवार को बहस के दौरान पाकिस्तान की ओर से लगाए गए “बेबुनियाद आरोपों” का जवाब देते हुए कहा कि 1971 में हुए महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले “शर्मनाक रिकॉर्ड” हैं।
पन्नूज़ संयुक्त राष्ट्र की बहस ‘संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा से बचे लोगों की सुरक्षा और जीवन-रक्षक सेवाओं की उपलब्धता के लिए अभिनव रणनीतियाँ’ पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा – “1971 में पाकिस्तान सेना द्वारा महिलाओं के खिलाफ घृणित यौन अपराधों को जिस प्रकार अंजाम दिया गया, वह शर्मनाक रिकॉर्ड है।”
भारतीय राजनयिक ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हुए नरसंहार और बलात्कारों का उल्लेख किया।
“यह शर्मनाक पैटर्न आज भी जारी है। महिलाओं और लड़कियों के अपहरण, मानव तस्करी, कम उम्र में और जबरन विवाह, घरेलू दासता, यौन हिंसा और अल्पसंख्यक धार्मिक एवं जातीय समुदायों की महिलाओं का जबरन धर्मांतरण लगातार हो रहा है। इसका जिक्र हालिया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (OHCHR) की रिपोर्टों में भी है।”
पन्नूज़ ने कहा कि “विडंबना यह है कि जो अपराधी खुद इन अपराधों को अंजाम देते हैं, वही अब न्याय के ठेकेदार बनकर सामने आते हैं।”
उन्होंने पाकिस्तान के इस आरोप का जवाब दिया कि “कश्मीर में समुदायों को अपमानित करने और सज़ा देने के लिए लंबे समय से यौन हिंसा का इस्तेमाल किया गया है।”
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यौन हिंसा के अपराधियों को सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए क्योंकि यह केवल व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि समाज के ताने-बाने को भी तोड़ देती है और पीढ़ियों तक गहरे घाव छोड़ जाती है।
उन्होंने यूएनएससी प्रस्ताव 2467 (2019) का हवाला दिया, जिसमें पीड़ितों को राहत, मुआवज़ा, स्वास्थ्य सेवाएँ, परामर्श, सुरक्षित आश्रय, कानूनी सहायता, पुनर्वास और पुनर्संलग्नता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
भारत की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पन्नूज़ ने कहा –
- भारत ने शांति अभियानों, मानवीय और विकास कार्यों में यौन शोषण और दुरुपयोग खत्म करने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र नेतृत्व मंडल (Circle of Leadership) में शामिल होकर यौन शोषण और दुरुपयोग की रोकथाम पर कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए घरेलू स्तर पर समग्र रणनीति लागू की है, जो संघर्ष स्थितियों में जीवन-रक्षक सेवाएँ उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकती है।
“भारत अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों के ज़रिए इच्छुक देशों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने के लिए तैयार है।”
पीटीआई एनपीके
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