संयुक्त राष्ट्र, 5 मार्च (पीटीआई) भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आईएसआईएस और अल-कायदा तथा उनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया है और रेखांकित किया है कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक “अस्तित्वगत खतरा” है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को कहा, “आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक अस्तित्वगत खतरा है। यह न तो सीमाएं जानता है, न राष्ट्रीयता और न ही जाति, और यह एक ऐसी चुनौती है जिसका अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सामूहिक रूप से मुकाबला करना चाहिए।”
संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-निरोधक कार्यालय (यूएनओसीटी) की सदस्य देशों के लिए वार्षिक राजदूत-स्तरीय ब्रीफिंग में अपने वक्तव्य में पुरी ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को याद किया, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के एक सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने अंजाम दिया था। लश्कर-ए-तैयबा संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकी संगठन है। इस हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी।
उन्होंने कहा, “हमें आईएसआईएस और अल-कायदा तथा उनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक ऐसा देश होने के नाते जो पिछले लगभग तीन दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है, “भारत आतंकवाद की सामाजिक-आर्थिक और मानवीय लागत, विशेष रूप से उसके पीड़ितों के लिए, भली-भांति समझता है।” भारत ने बहुपक्षीय सहयोग के एक केंद्रीय साधन के रूप में वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (जीसीटीएस) के महत्व पर भी जोर दिया।
पुरी ने कहा कि भारत जीसीटीएस की नौवीं समीक्षा के लिए परामर्श प्रक्रिया में दृढ़ और सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा और इस प्रक्रिया के दौरान सह-समन्वयक फिनलैंड और मोरक्को को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि 2022 में आतंकवाद-रोधी समिति के अध्यक्ष के रूप में भारत ने इन सिद्धांतों को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद-रोधी संरचना और संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर होने वाली बहस में शामिल करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा, “न्यूयॉर्क और विश्व भर में हमारी अनुवर्ती पहलें हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं,” जिसमें ‘दिल्ली घोषणा’ भी शामिल है—जो आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने से संबंधित एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। पुरी ने कहा कि यह मुद्दा कई सदस्य देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अक्टूबर 2022 में, भारत की अध्यक्षता में सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति (सीटीसी) ने नई दिल्ली और मुंबई में ‘आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला’ विषय पर एक विशेष बैठक आयोजित की थी।
इस विशेष बैठक के परिणामस्वरूप समिति ने आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने पर ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाया था।
उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से उसके साथ मिलकर क्षमता निर्माण और अपने साझेदारों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए काम करता रहेगा, ताकि आतंकवाद जैसी लगातार बदलती चुनौती का मुकाबला किया जा सके। पीटीआई वाईएएस जीएसपी जीएसपी
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