‘समुद्र प्रताप’ का सोमवार को कमीशनिंग: राजनाथ सिंह बोले—रक्षा में आत्मनिर्भरता कोई विलासिता नहीं

Samudra Pratap

नई दिल्ली, 5 जनवरी (पीटीआई) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ 5 जनवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा आईसीजी में कमीशन किया जाएगा, अधिकारियों ने रविवार को बताया।

114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। 4,200 टन वजनी यह पोत 22 नॉट से अधिक की गति और 6,000 समुद्री मील की परिचालन क्षमता (एंड्यूरेंस) से लैस है।

यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों के प्रवर्तन, समुद्री कानून लागू करने, खोज एवं बचाव अभियानों तथा भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा। इसे दिसंबर में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में औपचारिक रूप से तटरक्षक बल को सौंपा गया था।

आईसीजी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट में कहा, “भारतीय तटरक्षक पोत ‘समुद्र प्रताप’, दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला, को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी 2026 को गोवा शिपयार्ड में कमीशन करेंगे।” आईसीजी ने इस पोत का एक छोटा वीडियो भी साझा किया, जिसे तटरक्षक बल का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण पोत बताया गया।

इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा कि सिंह ने ‘समुद्र प्रताप’ के कमीशनिंग से एक दिन पहले गोवा में जीएसएल का दौरा किया। उन्होंने कहा, “गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और अन्य भारतीय शिपयार्डों द्वारा भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए बनाए गए जहाज़ भारत की संप्रभुता के तैरते प्रतीक हैं, जो खुले समुद्र में हमारी उपस्थिति, क्षमता और संकल्प को दर्शाते हैं।”

रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ को विलासिता नहीं, बल्कि एक “रणनीतिक आवश्यकता” बताया और इस आवश्यकता को साकार करने के लिए जीएसएल जैसी संस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसएल क्षमताओं का विकास, तकनीक का आत्मसात और स्वदेशी डिज़ाइन को सुदृढ़ कर रहा है, जिससे सशस्त्र बलों को समय पर उपकरणों की आपूर्ति हुई है और देश को आत्मनिर्भर बनाने की गति तेज़ हुई है।

समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक चुनौतियों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक खतरों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि आज के जटिल सुरक्षा वातावरण में भारतीय शिपयार्डों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा, “समुद्र में हमें मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, मानव तस्करी, पर्यावरणीय अपराध और ग्रे-ज़ोन चुनौतियों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिपयार्डों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।”

गोवा को देश के समुद्री इतिहास, नौसैनिक विरासत और रणनीतिक दृष्टि का केंद्र बताते हुए उन्होंने कहा कि जीएसएल भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख स्तंभों में से एक है और समुद्री सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एक “प्रोएक्टिव समुद्री राष्ट्र” के रूप में उभर रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने तकनीक के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जहाज़ों को अत्याधुनिक उपकरणों, एआई-सक्षम रखरखाव और साइबर-सुरक्षित प्लेटफॉर्म से लैस करना होगा।

उन्होंने कहा, “एक जहाज़ केवल स्टील, मशीनरी और तकनीक का संयोजन नहीं होता, बल्कि यह जनता के विश्वास और सशस्त्र बलों की अपेक्षाओं व आवश्यकताओं का प्रतीक होता है।”

तटरक्षक बल ने एक्स पर बताया कि 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बने इस 114.5 मीटर लंबे, 4,200 टन वजनी पोत की गति 22 नॉट से अधिक है और इसकी 6,000 समुद्री मील की क्षमता आईसीजी की प्रदूषण प्रतिक्रिया, अग्निशमन तथा समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी। पोत में ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जायरों-स्टेबलाइज़्ड स्टैंड-ऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर सहित अन्य आधुनिक उपकरण लगे हैं।

इसमें 30 मिमी सीआरएन-91 गन, दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज़्ड रिमोट-कंट्रोल्ड गन, एकीकृत फायर कंट्रोल सिस्टम, स्वदेशी इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम, शाफ्ट जनरेटर, सी बोट डेविट, पीआर बोट और उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि इस पोत का कमीशनिंग भारत की समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करेगा और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगा।

रक्षा निर्यात बढ़ाने पर जोर देते हुए सिंह ने बेल्जियम के लिए उच्च-प्रौद्योगिकी ड्रेजर बनाने के जीएसएल के प्रयासों की सराहना की और भारत को आत्मनिर्भर राष्ट्र के साथ-साथ शुद्ध रक्षा निर्यातक बनाने के लक्ष्य का समर्थन किया।

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