
नई दिल्ली, 13 नवम्बर (PTI) केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 12 जून को हुए विमान हादसे में, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी, विमान चालक (पायलट) पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी भी तरह का दोष नहीं लगाया गया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विमान हादसे की जांच AAIB की टीम द्वारा की जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत गठित की गई है और इसके लिए विधिक प्रावधान मौजूद है।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “AAIB की जांच किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं होती। इसका उद्देश्य केवल यह पता लगाना होता है कि दुर्घटना का कारण क्या था ताकि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो।”
एनजीओ की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि इस स्तर की बड़ी दुर्घटना के मामले में एक समानांतर जांच, जैसे कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी, भी की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पायलट फेडरेशन ने कहा है कि इन विमानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इनसे उड़ान भरने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह कार्यवाही एक एयरलाइन बनाम दूसरी एयरलाइन का विवाद नहीं बननी चाहिए, और सॉलिसिटर जनरल मेहता से मृतक के पिता द्वारा दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।
12 जून को एयर इंडिया की बोइंग 787-8 विमान (फ्लाइट AI171) जो अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जा रही थी, उड़ान भरने के तुरंत बाद एक मेडिकल हॉस्टल परिसर से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में कुल 265 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे।
241 मृतकों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली, 1 कनाडाई और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे। दुर्घटना में जीवित बचने वाला एकमात्र व्यक्ति ब्रिटिश नागरिक विश्वासकुमार रमेश था।
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