नई दिल्ली, 11 फरवरी (पीटीआई) दिल्ली पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड पोर्टिंग और बैंकिंग ऐप्स में अनधिकृत पहुंच से जुड़े एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारियां 38 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में की गई हैं।
अधिकारी ने कहा, “12 जनवरी को पीड़ित की शिकायत पर ई-एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें उसने अपने बैंक खातों से अवैध वित्तीय लेनदेन की सूचना दी थी।”
पुलिस के मुताबिक, यह ठगी 30 दिसंबर, 2025 से 12 जनवरी के बीच हुई, जिसमें आरोपियों ने कथित रूप से शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन और उससे जुड़े बैंकिंग ऐप्स तक अनधिकृत पहुंच बना ली।
पीड़ित को सोशल मीडिया कॉल और संदेशों के जरिए झूठे आश्वासन देकर धोखा दिया गया और उसे अनजाने में अपने डिवाइस का एक्सेस और नियंत्रण साझा करने के लिए बहकाया गया। इसके बाद आरोपियों ने एसएमएस अलर्ट और कॉल फॉरवर्डिंग सेवाएं डायवर्ट कर दीं और शिकायतकर्ता का सिम कार्ड धोखाधड़ी से झारखंड के जामताड़ा स्थित एक स्रोत स्थान पर पोर्ट करा लिया।
अधिकारी ने बताया, “कम्प्रोमाइज्ड सिम और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर आरोपियों ने शिकायतकर्ता के कई बैंक खातों से IMPS, NEFT और UPI के माध्यम से कुल 38.10 लाख रुपये विभिन्न लाभार्थी खातों में ट्रांसफर कर दिए।”
बैंक स्टेटमेंट की जांच के दौरान जांचकर्ताओं ने एक सरकारी बैंक में एक प्रमुख लाभार्थी खाता चिन्हित किया, जिसमें 99,999 रुपये जमा किए गए थे। यह खाता उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा निवासी विपुल कश्यप के नाम पर पंजीकृत पाया गया।
4 मई को क्राइम ब्रांच ने कश्यप को गिरफ्तार कर लिया। तकनीकी निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण के आधार पर मुख्य आरोपी आयुष शर्मा (21), जो ग्रेटर नोएडा का निवासी है, को हाल ही में नोएडा से गिरफ्तार किया गया।
अधिकारी ने बताया, “पूछताछ के दौरान शर्मा ने खुलासा किया कि वह अपने साथियों के साथ इंस्टाग्राम विज्ञापनों के जरिए लोगों को कमीशन पर अपने बैंक खाते और सिम कार्ड किराये पर देने के लिए लुभाता था। किराये पर लिए गए खातों और सिम का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जाता था।”
एक अन्य सह-आरोपी, राजस्थान के भिवाड़ी निवासी विशाल कुमार, जिसने कथित तौर पर शर्मा को सिम कार्ड उपलब्ध कराया था, को चिन्हित कर पूछताछ की गई और मामले में पाबंद किया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है। PTI BM NB

