आध्यात्मिकता और शोबिज़ के रोचक संगम में, साधगुरु जग्गी वासुदेव ने 29 अक्टूबर 2025 को प्रोड्यूसर नामित मल्होत्रा के साथ एक बेबाक बातचीत में नितेश तिवारी की भव्य फिल्म ‘रामायण’ में ‘KGF’ स्टार यश को रावण के रूप में कास्ट किए जाने पर मज़ाकिया अंदाज़ में सवाल उठाया।
‘वर्ल्ड ऑफ रामायण’ यूट्यूब चैनल पर प्रसारित इस एक घंटे की चर्चा को रातोंरात 20 लाख व्यूज़ मिले। बातचीत के दौरान साधगुरु ने खलनायकों की “भूंदी नाक” पर हंसी-मज़ाक करते हुए यश की आकर्षक शख्सियत की तारीफ़ की, जिससे #SadhguruOnRavana हैशटैग पर 9 लाख से अधिक X (पूर्व ट्विटर) मेंशन दर्ज हुए।
भारत के ₹101 अरब के मनोरंजन बाज़ार और 467 मिलियन सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच इस चर्चा ने फिल्म के उस साहसी दृष्टिकोण को उजागर किया, जो पौराणिक खलनायकों को मानवीय रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
जब मिथक और सिनेमा का हुआ रहस्यमय संगम
यह बातचीत साधगुरु की श्रृंखला ‘वर्ल्ड ऑफ रामायण’ का हिस्सा थी, जो इस महाकाव्य के दार्शनिक पहलुओं की गहराई से पड़ताल करती है।
नितेश तिवारी (दंगल) द्वारा निर्देशित और नामित मल्होत्रा की प्राइम फोकस स्टूडियोज़ तथा DNEG की ऑस्कर-विजेता VFX टीम द्वारा निर्मित यह फिल्म रणबीर कपूर (राम), साई पल्लवी (सीता) और यश (रावण) को मुख्य भूमिकाओं में लेकर बनाई जा रही है।
₹500 करोड़ के बजट वाली यह फिल्म भव्य लाइव-एक्शन और आध्यात्मिक गहराई का संगम है।
जहां रणबीर के “पिछले किरदारों” को लेकर पहले से विवाद चल रहा था, वहीं शिवभक्त और विद्वान रावण के रूप में यश की कास्टिंग ने नई बहस छेड़ दी।
साधगुरु, जो खुद पौराणिक कथाओं के गहरे जानकार हैं, बातचीत को राम के धर्म से रावण के चरित्र के कई आयामों तक लेकर गए — और इसी दौरान उनकी मज़ेदार टिप्पणी सामने आई।
साधगुरु की हंसीभरी टिप्पणी: “यश जैसा हैंडसम रावण?”
जब मल्होत्रा “परफेक्ट रावण” के चयन की प्रक्रिया बता रहे थे, साधगुरु मुस्कराते हुए बोले —
“मुझे नहीं पता यश रावण कैसे बन गया। यश तो बहुत हैंडसम आदमी है।”
फिर हंसते हुए बोले, “क्या आपने गौर किया है? खलनायकों की नाक हमेशा भूंदी होती है, नुकीली नहीं!”
पूरा कमरा ठहाकों से गूंज उठा। मल्होत्रा ने जवाब दिया, “यह तो नया ज्ञान है—अब ध्यान रखूंगा!”
मल्होत्रा ने बचाव में कहा कि यश जैसे सुपरस्टार में वह गहराई और करिश्मा है जो रावण के अलग-अलग “रंग” दिखा सकते हैं — एक भक्त शिवभक्त से लेकर एक दुखदायी शासक तक।
साधगुरु, जो यश को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, मुस्कराए और कहा कि रावण को “केवल खलनायक नहीं, बल्कि वेदों के आचार्य” के रूप में दिखाने की यह दिशा सही है।
मल्होत्रा का बचाव और साधगुरु की गहराईपूर्ण प्रतिक्रिया
मल्होत्रा ने आगे कहा, “हमें ऐसा कलाकार चाहिए था जो बेहद लोकप्रिय हो और जिसके ज़रिए रावण की भक्ति और गहराई दोनों झलक सकें—यश ऐसा कर सकते हैं।”
साधगुरु, अपने दार्शनिक अंदाज़ में बोले कि खलनायक को भी बारीकी से समझना चाहिए।
रणबीर के “राम” वाले विवाद पर उन्होंने कहा, “यह अनुचित है। कल को वही किसी और फिल्म में रावण भी बन सकता है। अभिनेता रूप बदलते हैं—वे किरदार में खो जाते हैं, पर वही किरदार नहीं बन जाते।”
इस बातचीत ने ‘रामायण’ को और भी मानवीय दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।
साधगुरु ने कहा कि दर्शकों की अपेक्षाएं ही किसी फिल्म की सफलता तय करती हैं, जबकि मल्होत्रा ने रावण के दस सिरों वाले VFX की झलक का ज़िक्र करते हुए कहा कि फिल्म का 60% शूटिंग पूरा हो चुका है और इसे दो भागों में रिलीज़ किया जाएगा।
यश का “लंकेश लुक”—लंबे बालों और विद्वत वस्त्रों में—पहले ही टीज़र हिट बन चुका है।
जब रावण भी सुंदर और हास्य पवित्र हो गया
साधगुरु की यश पर टिप्पणी आलोचना नहीं थी, बल्कि एक कॉस्मिक कॉमेडी थी।
‘रामायण’ जब रावण के आकर्षण को नए नज़रिए से पेश करती है, तो यह सवाल उठाती है—क्या सौंदर्य में भी क्रूरता समा सकती है?
मल्होत्रा की दृष्टि और साधगुरु की विनोदी बुद्धि इस प्रश्न का उत्तर देती हैं—हाँ, जब ज्ञान और मनोरंजन मिलते हैं, तब सिनेमा भी आध्यात्मिक हो उठता है।
— मनोज एच.

