चंडीगढ़, 3 सितंबर (पीटीआई) — हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को सामान्य उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती के जीएसटी परिषद के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह “अत्यंत सराहनीय” है।
सैनी ने कहा, “सामान्य उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी दरों को कम करने का निर्णय अत्यंत सराहनीय है।”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि इन दरों में कटौती का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और हरियाणा सरकार ने इन सभी निर्णयों को पूर्ण समर्थन दिया है।
बाल तेल से लेकर कॉर्न फ्लेक्स, टीवी, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा नीतियों जैसी आम उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती की गई है।
जीएसटी परिषद ने कर संरचना को संशोधित करते हुए 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो दरों तक सीमित कर दिया है, जो 22 सितंबर से प्रभावी होंगी।
लगभग सभी व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं पर दरों में कटौती की जाएगी, क्योंकि सरकार का उद्देश्य घरेलू खर्च को बढ़ावा देना और अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक प्रभाव को कम करना है।
एक दिन चली बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और किसी भी राज्य ने असहमति नहीं जताई।
परिषद ने वर्तमान में लागू चार स्लैब — 5%, 12%, 18% और 28% — को घटाकर दो स्लैब — 5% और 18% — करने को मंजूरी दी है। कुछ खास वस्तुओं जैसे लग्जरी कारें, तंबाकू और सिगरेट के लिए 40% का विशेष स्लैब प्रस्तावित किया गया है।
सीतारमण ने कहा कि गुटखा, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों एवं सिगरेट को छोड़कर बाकी सभी उत्पादों पर नई दरें 22 सितंबर से, जो कि नवरात्रि का पहला दिन है, लागू होंगी।
मुख्यमंत्री सैनी, जिनके पास वित्त विभाग का भी प्रभार है, ने नई दिल्ली में हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता सीतारमण ने की। बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा जीएसटी परिषद के सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक के बाद सैनी ने कहा कि खाद्य वस्तुएं, स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि उपकरण, उर्वरक इनपुट, नवीकरणीय ऊर्जा, वस्त्र और अन्य सामान्य उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी दरें युक्तिसंगत की गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों, उद्यमियों, सेवा प्रदाताओं और आम जनता को महत्वपूर्ण राहत देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी में कटौती से कीमतें कम होंगी, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण होगा और आम जनता को पौष्टिक भोजन सुलभ हो सकेगा।
सैनी ने विशेष रूप से ट्रैक्टर और उनके पुर्जों पर जीएसटी दरों में कटौती को रेखांकित किया, और कहा कि इससे किसानों की इनपुट लागत कम होगी, आधुनिक मशीनरी को अपनाने में मदद मिलेगी और कृषि के आधुनिकीकरण में योगदान मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पैकेज्ड दूध और चीज़ जैसी डेयरी परियोजनाओं पर जीएसटी दर को 5 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने का निर्णय लिया गया है।
इसी तरह, घी, मक्खन और सूखे मेवों पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि सामान्य खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी की पूरी तरह से समाप्ति हरियाणा के “देसी फूड बिजनेस” को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये निर्णय न केवल हरियाणा के फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देंगे, बल्कि कृषि से लेकर उपभोक्ता तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत बनाएंगे।
सैनी ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई जीएसटी स्वतंत्रता के बाद देश का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है।
उन्होंने कहा कि इससे कर प्रणाली सरल और पारदर्शी हुई है, राज्यों के बीच व्यापार बाधाएं समाप्त हुई हैं और ‘वन इंडिया- वन टैक्स- वन मार्केट’ की परिकल्पना साकार हुई है।
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि हरियाणा का नेट एसजीएसटी संग्रह वित्त वर्ष 2018-19 में 18,910 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 39,743 करोड़ रुपये हो गया है, जो 110 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
हालांकि राज्य की जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल अपेक्षाकृत छोटा है, फिर भी हरियाणा देश के प्रमुख कर संग्रह करने वाले राज्यों में एक बनकर उभरा है और 2024-25 में कुल सकल जीएसटी संग्रह के मामले में बड़े राज्यों में पांचवें स्थान पर रहा है।
पीटीआई एसयूएन एचवीए
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