
नई दिल्ली, 20 जनवरी (PTI): कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि देश में उच्च शिक्षा के लिए बनाए जाने वाले किसी भी नियामक को संविधान के अनुच्छेद 15(5) के कार्यान्वयन की निगरानी करना अनिवार्य होना चाहिए। यह अनुच्छेद सरकार को निजी संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) के छात्रों के लिए आरक्षण लागू करने का अधिकार देता है।
कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि अनुच्छेद 15(5) को मनमोहन सिंह सरकार ने 93वें संविधान संशोधन के माध्यम से लागू किया था, जो आज से ठीक 20 साल पहले प्रभावी हुआ था।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025, जो देश में उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर स्थापित करने का प्रस्ताव है, 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया और अगले दिन संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया।
रमेश ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा, “किसी भी नियामक को संविधान के अनुच्छेद 15(5) के कार्यान्वयन की निगरानी करना अनिवार्य होना चाहिए। यह अनुच्छेद आज से ठीक बीस साल पहले लागू हुआ था और इसे डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 93वें संशोधन के माध्यम से लागू किया था।”
अनुच्छेद 15(5) के लागू होने से केंद्रीय वित्तपोषित उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में OBC छात्रों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत हुई, जिसमें IIT, IIM, केंद्रीय विश्वविद्यालय और NIT शामिल हैं। रमेश ने कहा कि तब से लाखों OBC छात्रों ने इस आरक्षण का लाभ उठाया, जिससे आर्थिक और सामाजिक गतिशीलता में सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 15(5) सरकार को निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण लागू करने का अधिकार भी देता है। हालांकि इसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
रमेश ने बताया कि 6 मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रामति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ मामले में अनुच्छेद 15(5) की वैधता को स्पष्ट रूप से मान्यता दी, और यह स्पष्ट किया कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में भी SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण लागू किया जा सकता है।
हालांकि वर्तमान में संसद ने अनुच्छेद 15(5) लागू करने वाला कोई कानून पारित नहीं किया है। अगस्त 2025 में संसदीय स्थायी समिति ने रिपोर्ट में संसद से मांग की कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने वाला कानून बनाया जाए। समिति ने पाया कि इन वर्गों का निजी शिक्षा संस्थानों में प्रतिनिधित्व बेहद कम और अस्वीकार्य स्तर पर है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर कांग्रेस ने सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मोदी सरकार से इसे पूरी तरह लागू करने का आह्वान किया।
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