सिब्बल ने पीएम, सीएम और मंत्रियों को हटाने वाले विधेयकों पर सरकार को घेरा, बोले- ऐसे कानून संविधान के लिए दीमक

नई दिल्ली, 21 अगस्त (PTI) राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गुरुवार को सरकार की उन विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताई जिनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री को गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तारी में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून संविधान के ढांचे के लिए “दीमक” की तरह हैं।

सिब्बल ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों का मकसद विपक्षी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को निशाना बनाना है और सरकार संविधान की मूल आधारशिला को “नष्ट” कर रही है। उन्होंने हालांकि विश्वास जताया कि सरकार इन विधेयकों को पारित नहीं करा पाएगी क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो सरकार के पास नहीं है।

उन्होंने कहा, “2014 से अब तक हमने कई ऐसे कानून देखे हैं जिनका उद्देश्य संविधान द्वारा दिए गए मानवाधिकारों को छीनना है। ऐसे कानून संविधान की संरचना के लिए दीमक की तरह हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में ये तीन विधेयक पेश किए थे। विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया, मसौदा कानून की प्रतियां फाड़ दीं और नारेबाजी करते हुए शाह की सीट तक पहुंच गए।

शाह के प्रस्ताव पर, लोकसभा ने इन विधेयकों को जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) को भेजा है, जिसमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे।

ये तीन विधेयक हैं –

  1. सरकार के केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025
  2. संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025
  3. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025

सिब्बल ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और हेमंत सोरेन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विधेयक विपक्ष को निशाना बनाने के लिए लाए गए हैं।

उन्होंने कहा, “अगर आप लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सत्ता में आते हैं, तो यह सरकार उसे नष्ट कर देगी या फिर हेराफेरी के जरिए सत्ता में आने ही नहीं देगी।”

सिब्बल ने गृह मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा, “गृह मंत्री ने दीमक की बात की थी। मैं कहना चाहता हूं कि ऐसे कानून ही संविधान के लिए दीमक हैं।”

सिब्बल ने दावा किया कि सरकार “डरी हुई” है और लोग लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के पीछे खड़े हो रहे हैं, जिनकी बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान लाखों की भीड़ जुट रही है।

विधेयकों में प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध में गिरफ्तार कर लगातार 30 दिन हिरासत में रखा जाता है, तो वह 31वें दिन पद से अयोग्य हो जाएंगे।

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