सीआईटीयू ने चार श्रम संहिताओं के खिलाफ विरोध दर्ज कराया

CITU lodges protest against four Labour Codes

शिमला, 12 फरवरी (भाषा)। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय संघों के एक संयुक्त मंच के आह्वान के जवाब में गुरुवार को चार श्रम संहिताओं के खिलाफ सीआईटीयू के बैनर तले हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं।

सीआईटीयू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि चार श्रम संहिताएं श्रमिकों पर गुलामी लागू करेंगी।

शिमला में उपायुक्त कार्यालय के पास सभा को संबोधित करते हुए मेहरा ने न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये, आउटसोर्सिंग के बजाय नियमित रोजगार और अन्य अस्थायी नौकरियों, मनरेगा कानून को समाप्त करने और श्रम कल्याण बोर्ड को आर्थिक लाभ देने की मांग की।

अन्य मांगों में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 18 प्रतिशत टैरिफ को समाप्त करना, किसानों के लिए ऋण राहत, उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना, किसानों की आत्महत्या को रोकना, भूमि और घरों से बेदखली को समाप्त करना और प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त मुआवजा शामिल था।

उन्होंने कहा कि श्रम संहिता के लागू होने से 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा, हड़ताल पर जाने वाले श्रमिकों के लिए कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

स्थायी रोजगार के बजाय अनुबंध और निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा, और नए कोड के तहत काम के घंटे आठ से बढ़ाकर बारह घंटे कर दिए गए हैं। पीटीआई बीपीएल बाल बाल

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