सीईसी, ईसी को दी गई कानूनी प्रतिरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: A view of Supreme Court of India, in New Delhi, Tuesday, Dec. 16, 2025. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_16_2025_000045B)

नई दिल्ली, 12 जनवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को सीईसी अधिनियम, 2023 के तहत दी गई प्रतिरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका की जांच करने पर सहमति जताई।

मुख्य न्यायाधीश भारत सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, हालांकि प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत लोक प्रहरी नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है।

इस प्रावधान के अनुसार, “उस समय प्रभावी किसी भी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, कोई भी न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही को स्वीकार या जारी नहीं रखेगा, जो है या रहा है मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त, उसके द्वारा किए गए, किए जाने का दावा किए गए या बोले गए किसी भी कार्य, बात या शब्द के लिए, जो उसके आधिकारिक कर्तव्य या कार्य के निर्वहन में या उसके दौरान किया गया हो।”

याचिका में दावा किया गया है कि यह प्रावधान “सीईसी और ईसी को अभूतपूर्व और निरंकुश शक्ति प्रदान करता है, क्योंकि यह उन्हें उनके पद के घोर दुरुपयोग से जुड़े कृत्यों के लिए किसी भी दीवानी और यहां तक कि आपराधिक कार्यवाही से आजीवन पूर्ण, स्थायी और सर्वव्यापी प्रतिरक्षा देता है।” पीटीआई पीकेएस एआरआई

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