
नई दिल्ली, 4 फरवरी (पीटीआई) फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर गए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने पेरिस में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देना रहा।
एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सीजेआई के साथ फ्रांस और मोनाको में भारत के राजदूत संजीव सिंगला भी मौजूद थे। उन्होंने फ्रांसीसी संवैधानिक परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड फेरांद से मुलाकात की, जहां न्यायिक प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने न्यायक्षेत्र में न्याय वितरण को बेहतर बनाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर जोर दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने काउंसिल ऑफ स्टेट के उपाध्यक्ष डिडिएर टैब्यूतो से भी मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों की न्यायिक प्रणालियों, अदालतों की संरचना और मामलों के निपटारे के तरीकों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
यात्रा के दौरान सीजेआई ने इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा पेरिस बार एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इंडो-फ्रेंच जनरल काउंसल और बिज़नेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य भाषण भी दिया। उन्होंने भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के महत्व और भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में हमारे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय तेजी आई है, जो 2009-10 में 6.4 अरब डॉलर से बढ़कर पिछले वित्त वर्ष में 15.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।”
“सीमापार विवाद समाधान: न्यायालय, मध्यस्थता और भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026” विषय पर बोलते हुए न्यायमूर्ति कांत ने कहा, “फ्रांस और भारत का संबंध सुविधा का परिणाम नहीं है, बल्कि सदियों में गढ़ा गया एक मजबूत बंधन है। आज, इस इतिहास की नींव पर खड़े होकर हम एक ऐसे विश्व का सामना कर रहे हैं जो अनिश्चितताओं से भरा है।”
उन्होंने आगे कहा, “विघटनकारी ताकतें और भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पूरी रूपरेखा को अस्थिर करने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे समय में फ्रांस-भारत साझेदारी कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक जीवनरेखा है।”
सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने फ्रांस की सर्वोच्च अदालत कोर्ट डी कैसैशन के वाणिज्यिक चैंबर के अध्यक्ष विंसेंट विग्नो से भी मुलाकात की। इस दौरान मध्यस्थता और सुलह में हो रहे विकास पर चर्चा हुई और दोनों देशों के विधि समुदायों के बीच सहयोग को और गहरा करने का संकल्प लिया गया।
यात्रा के समापन से पहले सीजेआई ने एसोसिएशन ऑफ साउथ एशियन लॉयर्स फ्रांस के सदस्यों से भी बातचीत की और विभिन्न कानूनी प्रणालियों के बीच सेतु बनाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
