
जम्मू, 6 फरवरी (पीटीआई)
सीमा सुरक्षा को आधुनिक साधनों से सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि अग्रिम मोर्चों पर तैनात कर्मियों की निरंतर सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्नत तकनीक से पैदा हो रही नई चुनौतियों का मुकाबला भी उतनी ही उन्नत तकनीकी समाधानों से किया जाना चाहिए।
शाह जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे अग्रिम चौकियों के दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सशस्त्र बलों की भूमिका की भी सराहना की, जब जम्मू फ्रंटियर ने सीमा पार 118 दुश्मन चौकियों और तीन आतंकी लॉन्च पैड को नष्ट किया था।
उन्होंने कहा कि सरकार और बीएसएफ दोनों का साझा उद्देश्य देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना है और कुछ वर्ष पहले जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, वे आज की चुनौतियों से पूरी तरह अलग हैं।
गृह मंत्री ने कहा, “कुछ साल पहले सीमाओं पर जो चुनौतियां थीं, वे आज की चुनौतियों से बिल्कुल अलग हैं। अग्रिम मोर्चों पर आपकी निरंतर सतर्कता अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन जैसे-जैसे उन्नत तकनीक के जरिए नई चुनौतियां सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे हमें उनका मुकाबला करने के लिए तकनीकी समाधान भी खोजने होंगे।”
इस दौरान उनके साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन कुमार डेका और बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार भी मौजूद थे। उन्होंने हिरानगर सेक्टर में गुरनाम और बोबियान सीमा चौकियों का दौरा किया।
उनका यह दौरा सीमा प्रबंधन को मजबूत करने, आतंकियों की घुसपैठ और हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के प्रयासों के बीच हुआ है। पिछले दो हफ्तों में कठुआ, उधमपुर और किश्तवाड़ जिलों में लगभग एक दर्जन मुठभेड़ों में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के चार कट्टरपंथी पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए हैं।
शाह गुरुवार देर रात दो दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत उपराज्यपाल सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने किया।
कठुआ में गृह मंत्री ने बोबियान में सीमा प्रहरियों के लिए छह कल्याणकारी योजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास किया। बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे सीमा निगरानी का जायजा लेने और जवानों से सीधे संवाद करने आए हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने यह संकल्प लिया है कि बीएसएफ के 60वें वर्ष को बीएसएफ के आधुनिकीकरण और बीएसएफ कर्मियों व उनके परिवारों के कल्याण का वर्ष बनाया जाएगा। गृह मंत्रालय में एक टीम इन दोनों पहलुओं पर काम कर रही है।”
बीएसएफ कर्मियों के कल्याण के लिए सरकार एक विशेष योजना भी लाएगी।
“इसके अलावा, सरकार तकनीक के आधार पर सीमा सुरक्षा के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक धनराशि खर्च करने को तैयार है। मेरा मानना है कि बेहतर सीमा अवसंरचना और आधुनिक उपकरण आपको अपने कर्तव्यों के निर्वहन में काफी मदद करेंगे। इससे आपकी कठिनाइयों को भी कुछ हद तक कम करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आप और बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें,” उन्होंने कहा।
बीएसएफ जवानों को शुभकामनाएं देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि उनके कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के कारण ही पूरा देश चैन की नींद सोता है और सुरक्षित महसूस करता है।
उन्होंने कहा, “जब भी मैं किसी बीएसएफ चौकी पर जाता हूं—चाहे वह कच्छ का रेगिस्तान हो, राजस्थान हो या जम्मू-कश्मीर का क्षेत्र—मैं हमेशा आपके कर्तव्यभाव, सजगता और उच्च मानकों से सीख लेकर लौटता हूं।”
उन्होंने कहा कि सभी बलों में यदि कर्तव्यनिष्ठ सेवा और समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण है, तो वह सीमा पर दिन-रात तैनात बीएसएफ के जवान हैं।
“यह भावना आपके 60 वर्षों के शौर्यपूर्ण इतिहास में रची-बसी है, जिसने पूरे देश में आपको सम्मान और प्रशंसा दिलाई है,” उन्होंने कहा।
शाह ने कहा कि जब भी घुसपैठ या अतिक्रमण का खतरा पैदा हुआ, बीएसएफ एक अभेद्य दीवार की तरह डटी रही और देश को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर काम किया।
पिछले वर्ष मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ द्वारा दिखाया गया असाधारण साहस उसके छह दशक लंबे इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गया है।
उन्होंने कहा, “उस कठिन समय में भी आप सभी ने सीमा के प्रहरी होने की भावना को जीवित रखा और उसे और ऊंचा किया। जम्मू-कश्मीर फ्रंटियर के तहत बीएसएफ ने 118 चौकियों और तीन आतंकी लॉन्च पैड को नष्ट किया।”
शाह ने जम्मू सेक्टर में सर्वोच्च बलिदान देने वाले उपनिरीक्षक मोहम्मद इम्तियाज और कांस्टेबल दीपक चिंगथम को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें उनकी असाधारण बहादुरी के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि न केवल सीमाओं पर, बल्कि देश के अंदरूनी इलाकों—चाहे वह मणिपुर का कठिन भूभाग हो, पूर्वोत्तर राज्य हों या ओडिशा और छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र—बीएसएफ ने साहस, प्रतिबद्धता और वीरता का परिचय दिया है।
पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर में पंजाब में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “उस समय आपने मानवता का परिचय दिया और लोगों के प्रति गहरी संवेदना दिखाई। जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मुझसे मिलने आए, तो उन्होंने स्वयं कहा कि अगर बीएसएफ वहां नहीं होती, तो बाढ़ के दौरान लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जातीं।”
गृह मंत्री ने बोबियान सीमा चौकी पर शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए बलिदान देने वाले सीमा प्रहरियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की… सैनिकों का बलिदान और अटूट समर्पण हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। मैं उनके अदम्य साहस और वीरता को नमन करता हूं।”
(पीटीआई)
