सीरिया सरकार द्वारा खोले गए गलियारों से सैकड़ों लोगों के पलायन के बाद अलेप्पो में झड़पें

Ahmad al-Sharaa

अलेप्पो (सीरिया), 7 जनवरी (एपी): सीरिया के उत्तरी शहर अलेप्पो में बुधवार को झड़पें शुरू हो गईं, जब एक दिन पहले हुई घातक हिंसा के बाद सरकार द्वारा नागरिकों के निकलने के लिए खोले गए दो गलियारों से सैकड़ों लोग मुख्य रूप से कुर्द बहुल दो इलाकों से बाहर निकले।

सीरियाई सेना ने शेख़ मक़सूद और अशरफिएह मोहल्लों के लोगों को दोपहर 3 बजे (1200 जीएमटी) तक इलाका छोड़ने का समय दिया था, जिसके बाद इन इलाकों को “बंद सैन्य क्षेत्र” घोषित किया जाना था। समय सीमा समाप्त होते ही दोनों इलाकों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं।

सीरियन सिविल डिफेंस के अनुसार, दोपहर तक (0900 जीएमटी) करीब 850 लोग इन दोनों मोहल्लों से निकल चुके थे। इससे एक दिन पहले हुई झड़पों और गोलाबारी में कुर्द नेतृत्व वाले और अमेरिका समर्थित सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (एसडीएफ) के नियंत्रण वाले इलाकों में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में चार लोग मारे गए थे। हिंसा में दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं।

सीरिया के सूचना मंत्रालय ने कहा कि सेना अलेप्पो में “सीमित सैन्य अभियान” शुरू करेगी। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम एसडीएफ द्वारा देश के सबसे बड़े शहर और कभी उसके वाणिज्यिक केंद्र रहे अलेप्पो के सरकार-नियंत्रित इलाकों पर किए गए हमलों के जवाब में उठाया जा रहा है। मंत्रालय ने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में एसडीएफ के हमलों में 20 से अधिक नागरिक मारे गए, 150 से ज्यादा घायल हुए और 25 से अधिक सैनिकों की मौत हुई।

एसडीएफ ने बुधवार दोपहर एक बयान में कहा कि सरकारी बल शेख़ मक़सूद और अशरफिएह इलाकों पर भारी हथियारों से हमला कर रहे हैं। उसने कहा कि कुर्द बल इस हमले को नाकाम करने और इलाकों व उनके निवासियों की रक्षा के लिए “कड़ा प्रतिरोध” कर रहे हैं।

दोनों पक्षों के बीच यह अब तक की सबसे घातक झड़प मानी जा रही है और यह ऐसे समय में हुई है जब एसडीएफ को राष्ट्रीय सेना में विलय करने के प्रयासों में बहुत कम प्रगति हुई है।

हाल के महीनों में इन दोनों कुर्द बहुल इलाकों में रुक-रुक कर झड़पें होती रही हैं। पहले की लड़ाइयाँ संघर्षविराम समझौतों के साथ समाप्त हुई थीं।

बुधवार को अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ इलाका छोड़ने वाले एक कुर्द व्यक्ति ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि दोनों इलाकों के भीतर हालात बेहद खराब हैं, जहां भोजन और पीने के पानी की भारी कमी है।

“मैं अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी बगीचे में रहने को भी तैयार हूं,” उस व्यक्ति ने कहा, जिसने संभावित प्रतिशोध के डर से अपना नाम नहीं बताया। उसने कहा कि वह मूल रूप से उत्तरी क्षेत्र आफ़रीन का रहने वाला है, जिस पर 2018 में तुर्की सेना और तुर्की समर्थित लड़ाकों ने कब्ज़ा कर लिया था।

अदीबा अल्लो ने कहा कि मंगलवार को एक गोला उनके घर पर गिरा, जिससे उन्हें अपने बच्चों के साथ भागना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्हें एक फोन नंबर के साथ संदेश मिले हैं, जिस पर ठहरने की जगह न होने की स्थिति में संपर्क किया जा सकता है।

मंगलवार शाम से स्थिति अपेक्षाकृत शांत थी, लेकिन बुधवार दोपहर फिर से हिंसा भड़क उठी।

एसडीएफ के पास हजारों लड़ाके हैं और वही मुख्य बल है, जिसे सीरिया की सेना में शामिल किया जाना है।

अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के नेतृत्व वाली दमिश्क सरकार ने मार्च में एसडीएफ के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत उत्तर-पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाला एसडीएफ 2025 के अंत तक सीरियाई सेना में विलय करेगा। हालांकि, इसे लागू करने के तरीके को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अप्रैल में इस समझौते के तहत शेख़ मक़सूद और अशरफिएह से दर्जनों एसडीएफ लड़ाके बाहर निकले थे।

केंद्रीय सरकार और एसडीएफ के अधिकारी रविवार को दमिश्क में फिर मिले, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने कहा कि कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

नई सीरियाई सेना में शामिल कुछ गुट, जो दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के पतन के बाद बने, पहले तुर्की समर्थित विद्रोही समूह थे, जिनका कुर्द बलों के साथ लंबे समय से टकराव रहा है।

एसडीएफ वर्षों से इस्लामिक स्टेट समूह के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का प्रमुख साझेदार रहा है, लेकिन तुर्की इसे कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) से जुड़े होने के कारण एक आतंकवादी संगठन मानता है। पीकेके ने तुर्की में लंबे समय से विद्रोह चला रखा है, हालांकि अब शांति प्रक्रिया जारी है।

एसडीएफ और सीरियाई सरकार दोनों ने एक-दूसरे पर मार्च में हुए समझौते को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।