सीसीएस की बैठक पीएम मोदी की अध्यक्षता में; पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा, भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image released on March 1, 2026, Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Amit Shah, Rajnath Singh and Nirmala Sitharaman, National Security Advisor (NSA) Ajit Doval, Chief of Defence Staff (CDS) General Anil Chauhan, Foreign Secretary Vikram Misri and others during a meeting of the Cabinet Committee on Security (CCS), the highest decision-making body on security and strategic matters of the country, in New Delhi. The meeting is understood to have been convened in the wake of the prevailing West Asia situation following the attack on Iran by the United States and Israel and the killing of Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei. (PMO via PTI Photo) (PTI03_01_2026_001044B)

नई दिल्ली, 2 मार्च (पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात देश के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। बताया जाता है कि बैठक में पश्चिम एशिया में ताजा संघर्ष से उत्पन्न हो रही स्थिति पर चर्चा की गई।

यह बैठक अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले तथा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।

एक सूत्र ने बिना किसी विवरण का खुलासा किए कहा, “प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की।”

सीसीएस की यह बैठक मोदी के राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो दिवसीय दौरे के बाद रात लगभग 9.30 बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद आयोजित की गई।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित समिति के सदस्य शामिल हुए। शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा और शक्तिकांत दास, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी बैठक में मौजूद थे।

सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों तथा वहां फंसे लोगों की सुरक्षा और स्थिति बिगड़ने की स्थिति में उससे निपटने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

वर्तमान में पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है।

पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के कारण उड़ान सेवाएं बाधित होने से सैकड़ों भारतीय दुबई, दोहा और क्षेत्र के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। कई लोगों ने सहायता के लिए भारतीय सरकार से सोशल मीडिया के माध्यम से अपील की है।

सूत्रों ने बताया कि बैठक में ईरानी अधिकारियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से उत्पन्न स्थिति की भी समीक्षा की गई, जो भारतीय तेल वाहकों के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है।

ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि इज़राइल में 40,000 से अधिक भारतीय रहते हैं। खाड़ी और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है।

अतीत में भारत ने संघर्ष की स्थितियों के दौरान पश्चिम एशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से अपने हजारों नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला है।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि क्षेत्र भर में भारतीय मिशन अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और हेल्पलाइन भी सक्रिय कर दी गई हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की शनिवार तड़के इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमले में हत्या कर दी गई। ईरान के सरकारी टेलीविजन और सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने रविवार तड़के 86 वर्षीय नेता की मृत्यु की घोषणा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इससे ईरानियों को “अपने देश को वापस लेने” का “सबसे बड़ा अवसर” मिला है।

ट्रंप ने कहा कि भारी और सटीक बमबारी सप्ताह भर या आवश्यकता होने तक जारी रहेगी।

ईरान ने इस हमले के जवाब में इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ वैश्विक व्यापार केंद्र दुबई पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं।

रविवार को शिया समुदाय से जुड़े शोकाकुल लोग खामेनेई की हत्या पर आक्रोश और शोक व्यक्त करने के लिए भारत के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतर आए। पीटीआई एसीबी एआरआई

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