सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में ‘Thug Life’ फिल्म की रिलीज़ पर मांगा सरकार से जवाब

Mysuru: Members of Kannada organisation stage a protest against actor Kamal Haasan over his remarks on the Kannada language, in Mysuru, Thursday, May 29, 2025. (PTI Photo) (PTI05_29_2025_000208B) *** Local Caption ***

नई दिल्ली, 13 जून (पीटीआई): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा है एक याचिका पर जिसमें कमल हासन की फिल्म “Thug Life” की कर्नाटक में थिएटरों में स्क्रीनिंग को लेकर कथित धमकियों से सुरक्षा की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने यह नोटिस एम. महेश रेड्डी की याचिका पर जारी किया, जिसमें कमल हासन अभिनीत और मणिरत्नम निर्देशित तमिल फिल्म की स्क्रीनिंग पर कर्नाटक में लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई है।

पीठ ने इस मामले की सुनवाई अगले मंगलवार के लिए सूचीबद्ध की है।

रेड्डी ने अधिवक्ता ए. वेलन के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणन मिलने के बावजूद, कर्नाटक सरकार ने बिना किसी आधिकारिक निषेध आदेश या प्राथमिकी के, मौखिक निर्देशों और पुलिस हस्तक्षेप के माध्यम से इसके सिनेमाई प्रदर्शन को कथित रूप से रोक दिया है।

वेलन ने तर्क दिया कि राज्य की ये कार्रवाइयाँ संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असंवैधानिक प्रतिबंध हैं।

पीठ ने उनके इस तर्क को दर्ज किया कि हिंसा की धमकियों के चलते लगाया गया यह कथित प्रतिबंध किसी वैध प्रक्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि आतंक फैलाने के लिए चलाए जा रहे एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा है, जिसमें सिनेमा हॉलों को जलाने की स्पष्ट धमकी और भाषायी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाली हिंसा का उकसावा शामिल है।

याचिका में कहा गया, “यह भय और धमकी का शासन अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(g) (कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) का सीधा और घोर उल्लंघन है। इससे भी गंभीर यह कि यह राज्य की धर्मनिरपेक्ष संरचना और सार्वजनिक व्यवस्था पर एक योजनाबद्ध हमला है।”

यह भी आरोप लगाया गया कि कर्नाटक सरकार ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय ऐसे असंवैधानिक कृत्यों में मौन समर्थन की भूमिका निभाई है। जो लोग खुलेआम मौत, आगज़नी और सांप्रदायिक हिंसा की धमकी दे रहे हैं, उनके खिलाफ क़ानून का प्रभावी उपयोग न करना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक तरह से हिंसक असंवैधानिक ताकतों के आगे समर्पण है।

याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि “Thug Life” की स्क्रीनिंग पर जो व्यावहारिक रूप से प्रतिबंध लगाया गया है, उसे अवैध, असंवैधानिक और प्रारंभ से ही शून्य घोषित किया जाए, क्योंकि यह अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), और 21 का उल्लंघन है।

साथ ही, याचिका में सरकार और पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे राज्यभर के सभी ऐसे सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में, जो फिल्म को प्रदर्शित करना चाहते हैं, सुरक्षित और निर्बाध प्रदर्शन सुनिश्चित करें और इस फिल्म या भविष्य में किसी अन्य प्रमाणित फिल्म को लेकर डराने-धमकाने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दें।

इसके अतिरिक्त, याचिका में मांग की गई है कि उन सभी व्यक्तियों और संगठनों के पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही, जिसमें आपराधिक मुकदमा भी शामिल है, की जाए जिन्होंने इस फिल्म के प्रदर्शन को लेकर हिंसा, आगज़नी या सांप्रदायिक नफरत/हिंसा की धमकियाँ दी हैं या उसे भड़काया है।

गौरतलब है कि 9 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर थिएटर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया था और उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करने को कहा था।

“Thug Life” 5 जून को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। यह फिल्म 1987 की “Nayakan” के बाद कमल हासन और मणिरत्नम की पुनर्मिलन है। हालांकि, 70 वर्षीय हासन के कन्नड़ भाषा को लेकर दिए गए एक बयान के बाद उपजे विवाद के चलते, यह फिल्म कर्नाटक में रिलीज़ नहीं हो सकी।

फिल्म तमिल के अलावा तेलुगु, हिंदी और मलयालम में भी रिलीज़ हुई है।
पीटीआई एमएनएल ज़ेडएमएन

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