
नई दिल्ली, 17 फरवरी (PTI) – सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देओघर ट्रेजरी से जुड़े घोटाले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ CBI द्वारा दायर अपील की सुनवाई 22 अप्रैल तक स्थगित कर दी।
न्यायाधीश एमएम सुंदर्रेश और एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने मामले को टालते हुए कहा कि याचिकाएं पूरी नहीं हैं और कुछ आरोपी अब जीवित नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने अवैध आदेश पारित किया है और सजा कानून के उल्लंघन में स्थगित की गई है।
लालू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि कुछ आरोपियों को नोटिस नहीं भेजा गया है।
कोर्ट ने कहा, “हम दोनों जानते हैं कि यह विशेष अनुमति याचिका क्या है। हमें लगता है कि आप दोनों जानते हैं कि इसका परिणाम क्या होगा। हम सभी जानते हैं कि कानून का प्रश्न क्या है। ये लोग 60, 70 और 80 के दशक में हैं।
“फाइलें बस लटकी हुई हैं। हम अप्रैल में एक तारीख देंगे। जिन मामलों में प्रतिवादी का निधन हो गया है, हम उन्हें बंद कर देंगे,” पीठ ने कहा।
झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष जुलाई में CBI की याचिका स्वीकार की थी, जिसमें यादव को दी गई सजा की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी।
यादव को देओघर ट्रेजरी घोटाले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें कथित तौर पर 89 लाख रुपये की हेराफेरी शामिल थी।
विशेष CBI अदालत ने यादव को दोषी ठहराया और उन्हें 3.5 साल की सजा सुनाई।
CBI ने आदेश के खिलाफ अपील की, यह कहते हुए कि उस समय यादव पशुपालन विभाग के कुल प्रभारी थे।
जांच में पता चला कि यादव देओघर ट्रेजरी में हेराफेरी के बारे में अवगत थे। फिर भी निचली अदालत ने केवल 3.5 साल की सजा दी, जबकि इस अपराध की अधिकतम सजा सात साल है।
जब ये अनियमितताएं हुईं, तब झारखंड बिहार का हिस्सा था। PTI PKS
