नई दिल्ली, 10 जुलाई (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार में निर्वाचन आयोग (EC) को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति देने के बाद भाजपा ने कहा कि यह विपक्षी दलों के लिए “झटका” है, जो इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। भाजपा ने विपक्ष को सलाह दी कि वे इस पर हंगामा करने के बजाय वोटरों को साधने के लिए मेहनत करें।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने पीटीआई वीडियो से कहा कि चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू किया है ताकि केवल योग्य मतदाता ही मतदान कर सकें।
“यह चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है,” बिहार के सारण से सांसद रूडी ने कहा।
रूडी ने कहा, “विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई। यह उन राजनीतिक दलों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने इस अभियान (SIR के खिलाफ) की शुरुआत की थी।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अब ये विपक्षी दल डरे हुए हैं और बिहार चुनाव में अपनी हार को महसूस करने लगे हैं। उन्हें चाहिए कि वे अपने वोटरों को साधने के लिए मेहनत करें, न कि यह रोना रोएं कि उनके वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूची की विशेष जांच जारी रखने की अनुमति दी, जिसे “संवैधानिक दायित्व” बताया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान आधार, वोटर-आईडी और राशन कार्ड को पहचान दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाए।
रूडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुछ टिप्पणियां की हैं, जिन पर चुनाव आयोग गौर करेगा।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने पुनरीक्षण के समय को लेकर सवाल उठाए और कहा, “चुनाव से कुछ महीने पहले ही यह प्रक्रिया क्यों शुरू की गई, जब इसे पहले भी शुरू किया जा सकता था? अगर नागरिकता की जांच करनी थी, तो पहले करना चाहिए था, अब यह थोड़ा देर हो गया है।”
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें प्रमुख याचिकाकर्ता एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स है।
राजद सांसद मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी राजा, सपा के हरिंदर सिंह मलिक, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, झामुमो के सरफराज अहमद और सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य सहित कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
रूडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस आरोप को खारिज किया कि एनडीए सरकार बिहार चुनाव में भी महाराष्ट्र 2024 की तरह “धांधली” करना चाहती है। उन्होंने कहा, “यह अनुचित है कि चुनाव आयोग पर पक्षपात और अन्याय का आरोप लगाकर हंगामा किया जाए।”
भाजपा नेता ने कहा, “जो लोग वोट देने के योग्य हैं, उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं और जो योग्य नहीं हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। जो (भारतीय) नागरिक नहीं हैं या आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते, उनके नाम हटाए जाते हैं। यह प्रक्रिया पूरे देश में अपनाई जाती है।”
उन्होंने कहा, “मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवैधानिक प्रक्रिया है और चुनाव से पहले चुनाव आयोग को इसे शुरू करना ही होता है। बिहार में जो योग्य मतदाता हैं, उन्हें जोड़ा जाना चाहिए और जो योग्य नहीं हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए।”
बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
(PTI PK RC)
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