नई दिल्ली, 4 जून (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली वक्फ बोर्ड की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने राजधानी के शाहदरा क्षेत्र स्थित एक संपत्ति को “वक्फ संपत्ति” बताया था। अदालत ने कहा कि वहां लंबे समय से एक गुरुद्वारा संचालित हो रहा है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने वक्फ बोर्ड के वकील से कहा, “वहां एक गुरुद्वारा है, उसे वहीं रहने दें। यदि कोई दावा है भी, तो आपको यह कहते हुए उस पर से अपना दावा छोड़ देना चाहिए कि वहां पहले से गुरुद्वारा मौजूद है।”
शीर्ष अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के आदेश को चुनौती देने वाली वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बोर्ड की संपत्ति पर कब्जे की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।
बोर्ड ने अपनी याचिका में दावा किया था कि यह संपत्ति वक्फ संपत्ति है और “अनादिकाल” से वक्फ के रूप में प्रयुक्त होती आ रही है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, “वहां एक गुरुद्वारा संचालित हो रहा है।” इस पर वक्फ बोर्ड के वकील ने ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि वहां एक मस्जिद मौजूद थी।
उन्होंने कहा कि प्रतिवादी के एक गवाह ने खुद स्वीकार किया था कि वहां एक मस्जिद थी और “किसी तरह का गुरुद्वारा” वहां बनाया गया, लेकिन वह पंजीकृत नहीं था।
इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “यह किसी तरह का गुरुद्वारा नहीं, बल्कि पूरी तरह से कार्यशील गुरुद्वारा है।”
याचिका को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि एक गवाह ने स्वीकार किया था कि उस संपत्ति में 1947 से गुरुद्वारा संचालित हो रहा है। पीटीआई एबीए एबीए एएमके एएमके
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