
नई दिल्ली, 18 दिसंबर (पीटीआई) राज्यसभा में गुरुवार को परमाणु ऊर्जा विधेयक पर चर्चा हुई, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा तंत्र के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य कड़े नियंत्रण वाले नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना है। यह विधेयक बुधवार को लोकसभा से पारित हो चुका है।
मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा 24×7 विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का स्रोत है, जो अन्य नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों के मामले में संभव नहीं है।
उन्होंने कहा, “पिछले 10–11 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई भूमिका तय की है। भारत अब दूसरों का अनुसरण करने वाला देश नहीं रहा, जैसा पहले होता था… हम अब अग्रिम पंक्ति का राष्ट्र हैं। हम अब अनुयायी नहीं, बल्कि दूसरों को दिशा देने वाले बन गए हैं।”
उन्होंने जोड़ा कि 2014 के बाद पहली बार जलवायु, ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे वैश्विक मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।
जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और भारत के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपने लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल करे, ताकि पेट्रोलियम और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।
उन्होंने कहा, “हमें परमाणु ऊर्जा की भी जरूरत है, क्योंकि यह 24×7 भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत है, जबकि अन्य नवीकरणीय ऊर्जा विकल्प ऐसे नहीं हैं।”
मंत्री ने बताया कि परमाणु ऊर्जा को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। 2014 से पहले परमाणु ऊर्जा विभाग का बजट 13,879 करोड़ रुपये था, जो वर्तमान वर्ष में बढ़कर 37,483 करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने कहा कि 2015 में सरकार ने एक और साहसिक निर्णय लेते हुए परमाणु क्षेत्र को संयुक्त उपक्रमों (जॉइंट वेंचर्स) के लिए खोला, हालांकि यह सुविधा केवल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) तक सीमित थी, निजी कंपनियों के लिए नहीं।
2017 में कैबिनेट के फैसले के तहत 10 रिएक्टर स्थापित करने की थोक मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री ने चार परमाणु रिएक्टरों की आधारशिला रखी।
उन्होंने कहा कि 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के समय देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता सिर्फ 4.7 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 8.9 गीगावॉट हो गई है।
मंत्री ने बताया कि यह क्षमता कुल बिजली उत्पादन की आवश्यकता का सिर्फ 3 प्रतिशत है और इसे 2047 तक कम से कम 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए इस बजट में एक परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया गया है।
इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक निजी क्षेत्र के लिए परमाणु ऊर्जा को खोलना है, हालांकि इसके साथ सख्त सुरक्षा उपाय और निगरानी तंत्र भी होंगे।
विधेयक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को शामिल करने के लिए कुछ समायोजन और संशोधन आवश्यक हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि नियामक बोर्ड को भी इस विधेयक में शामिल किया गया है और उसे वैधानिक दर्जा दिया जा रहा है।
उन्होंने आश्वस्त किया, “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि सुरक्षा तंत्र के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” पीटीआई
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