सूडान के दारफुर क्षेत्र में और कस्बों तक फैला अकाल, युद्ध जारी रहने के बीच भूख विशेषज्ञों की चेतावनी

People fill water containers at a distribution point due to water outages in Khartoum, Sudan, Friday, Jan. 30, 2026.AP/PTI(AP01_31_2026_000033B)

काहिरा, 5 फरवरी (एपी) — युद्धग्रस्त सूडान के पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में अकाल फैलता जा रहा है और अब वहाँ के दो और कस्बे इसकी चपेट में आ गए हैं। वैश्विक भूख निगरानी समूह ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

यह घोषणा उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें समूह ने पिछले साल कहा था कि दारफुर के प्रमुख शहर एल-फ़शेर में—जो 18 महीने की घेराबंदी के बाद अर्धसैनिक बलों के कब्ज़े में चला गया—लोग अकाल झेल रहे हैं।

अप्रैल 2023 से सूडान के बड़े हिस्से में युद्ध छिड़ा हुआ है, जब पूर्वी अफ्रीकी देश की सेना और शक्तिशाली अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज़ (RSF) के बीच सत्ता संघर्ष भड़क उठा। इस संघर्ष ने संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट को जन्म दिया है।

इंटीग्रेटेड फ़ूड सिक्योरिटी फ़ेज़ क्लासिफ़िकेशन (IPC) की अकाल के प्रसार पर आई रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब गुरुवार को दक्षिणी सूडान में RSF के एक हमले में एक सैन्य अस्पताल में 22 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अस्पताल के चिकित्सा निदेशक और चिकित्सा स्टाफ के तीन अन्य सदस्य शामिल हैं।

दक्षिण कोर्दोफ़ान प्रांत के कौइक कस्बे में हुए इस हमले में आठ लोग घायल भी हुए, युद्ध पर नज़र रखने वाले चिकित्सा पेशेवरों के समूह ‘सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क’ ने बताया। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि हताहतों में कितने नागरिक थे।

दिल दहला देने वाली रिपोर्ट — IPC की रिपोर्ट के अनुसार दारफुर के उम्म बारू और केर्नोई कस्बों में अब अकाल की पुष्टि हो चुकी है। नवंबर में समूह ने कहा था कि क्षेत्र के प्रमुख शहर एल-फ़शेर में अकाल है, साथ ही दक्षिण कोर्दोफ़ान के काडुगली शहर में भी। उस समय यह भी कहा गया था कि सूडान के 20 अन्य इलाके अकाल के जोखिम में हैं।

उम्म बारू में 6 महीने से लगभग 5 वर्ष की आयु के करीब 53 प्रतिशत बच्चे तीव्र कुपोषण से ग्रस्त हैं, जबकि केर्नोई में 32 प्रतिशत बच्चों की स्थिति भी ऐसी ही है।

रिपोर्ट में कहा गया, “ये चिंताजनक दरें अत्यधिक मृत्यु के बढ़ते जोखिम की ओर संकेत करती हैं और यह आशंका पैदा करती हैं कि आस-पास के इलाके भी इसी तरह की विनाशकारी परिस्थितियों का सामना कर रहे हों।”

अक्टूबर 2025 में RSF द्वारा एल-फ़शेर पर कब्ज़ा होने के बाद बड़ी संख्या में लोग पास के कस्बों की ओर पलायन कर गए, जिससे पड़ोसी समुदायों के संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा और खाद्य असुरक्षा की दरें बढ़ गईं।

IPC ने अब तक केवल कुछ ही बार अकाल की पुष्टि की है—सबसे हाल में 2025 में इज़राइल-हमास युद्ध के दौरान उत्तरी ग़ाज़ा में। इससे पहले 2011 में सोमालिया में और 2017 व 2020 में दक्षिण सूडान में अकाल की पुष्टि की गई थी।

इस ताज़ा रिपोर्ट के साथ सूडान में अकाल-ग्रस्त क्षेत्रों की कुल संख्या बढ़कर नौ हो गई है। 2024 में उत्तरी दारफुर के पाँच अन्य इलाकों और सूडान के नूबा पर्वतीय क्षेत्र में भी अकाल पड़ा था।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि सूडान के इस युद्ध में 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, हालांकि राहत एजेंसियों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है। 1.4 करोड़ से ज़्यादा लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा है।

एल-फ़शेर—जो दारफुर में सेना के अंतिम गढ़ों में से एक था—पर RSF के कब्ज़े के बाद हाल के समय में लड़ाई कोर्दोफ़ान क्षेत्रों में केंद्रित हो गई है। हालांकि, सूडानी सेना ने काडुगली और पड़ोसी कस्बे डिलिंग की घेराबंदी तोड़कर कोर्दोफ़ान में कुछ बढ़त हासिल की है।

IPC की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि कोर्दोफ़ान में और अधिक लोग गंभीर भूख का सामना कर सकते हैं, क्योंकि संघर्ष ने घिरे हुए कस्बों और अलग-थलग इलाकों में खाद्य उत्पादन और आपूर्ति लाइनों को बाधित कर दिया है।

रोम स्थित इस समूह ने कहा, “सूडान के प्रभावित हिस्सों में और अधिक दरिद्रता, भूखमरी और मौतों को रोकने के लिए तत्काल और स्थायी युद्धविराम बेहद ज़रूरी है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, अकाल की घोषणा उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ कुपोषण से संबंधित कारणों से प्रति 10,000 लोगों पर कम से कम दो मौतें—या पाँच वर्ष से कम उम्र के चार बच्चों की मौत—होती हों; कम से कम हर पाँच में से एक व्यक्ति या परिवार को गंभीर खाद्य कमी और भुखमरी का सामना करना पड़ता हो; और पाँच वर्ष से कम उम्र के कम से कम 30 प्रतिशत बच्चे वजन-लंबाई के माप के आधार पर तीव्र कुपोषण से ग्रस्त हों—या ऊपरी भुजा की परिधि के आधार पर यह आंकड़ा 15 प्रतिशत हो। (एपी) GSP

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