
पंचकुला, 8 दिसंबर (PTI) – केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने रविवार को स्टार्ट-अप्स को भारत की वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि मार्गदर्शन और मेंटरशिप अगली पीढ़ी के स्टार्ट-अप्स को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
पंचकुला में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) में उद्यमियों और छात्रों के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने शोध क्षेत्र में मार्गदर्शन, जोखिम लेने की आवश्यकता और नवाचारकों को प्रारंभिक सहायता देने पर बल दिया।
फेस्टिवल के दूसरे दिन “स्टार्टअप जर्नी” पैनल चर्चा के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने विज्ञान शिक्षा तक सीमित पहुँच से उस चरण तक एक परिवर्तनकारी बदलाव देखा है, जहां अवसर धीरे-धीरे “लोकतांत्रित” हो रहे हैं और मध्यम पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली लोग उद्यमिता की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान अब केवल नीति निर्माण पर नहीं, बल्कि ऐसे सहायक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर है, जो विचारों को बाज़ार से जोड़ सके।
डॉ. सिंह ने बताया कि विज्ञान मंत्रालयों के तहत निरंतर प्रयासों से बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC), राष्ट्रीय मिशन और क्षेत्र-विशिष्ट कार्यक्रमों जैसे संरचित प्लेटफ़ॉर्म बनाए गए हैं, जो स्टार्ट-अप्स को निवेशकों, उद्योग भागीदारों और मेंटर्स से जोड़ते हैं।
नवाचार में असफलता अपरिहार्य होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि स्टार्ट-अप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है तो भारत को आरएंडडी में जोखिम स्वीकार करना और पहचानना सीखना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान में प्रगति के कारण भारत में दैनिक जीवन में आए बदलावों को उजागर किया, विशेष रूप से स्वास्थ्य और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में हुए सुधार का उल्लेख करते हुए। उन्होंने कहा कि आज भारत केवल वैश्विक तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में मौलिक समाधान विकसित कर रहा है।
युवाओं और छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए डॉ. सिंह ने स्टार्ट-अप लॉन्च करने से पहले स्पष्ट उद्देश्य और क्षमता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चरण में मेंटरिंग युवा नवाचारकों को उनकी ताकत समझने, विचारों को परिष्कृत करने और गलतियों से बचने में मदद करती है।
सरकारी पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विशेष रूप से छात्राओं को लक्षित कार्यक्रम विस्तार कर प्रतिभा पहचानने और संरचित मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
नियामक चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार “डी-रेगुलेशन, डी-लाइसेंसिंग और डी-क्रिमिनलाइजेशन” की दिशा में लगातार कदम उठा रही है ताकि उद्यमियों का बोझ कम हो सके। ये सुधार स्टार्ट-अप्स को अनुपालन के बजाय नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देते हैं, साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
पैनल चर्चा में स्टार्ट-अप संस्थापक और वरिष्ठ प्रशासक अपने अनुभव साझा कर रहे थे।
डॉ. सिंह ने IISF जैसे प्लेटफ़ॉर्म की सराहना की, जो नीतिनिर्माताओं, वैज्ञानिकों और आकांक्षी उद्यमियों को एक साथ लाता है, और कहा कि सार्वजनिक-निजी साझेदारी भारत की नवाचार रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में जिज्ञासा को पोषित करना और उन्हें प्रश्न पूछने का आत्मविश्वास देना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि वित्त पोषण या आधारभूत संरचना, क्योंकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य के लिए अपने नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को तैयार कर रहा है।
PTI SUN ARB ARB
