‘स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सभी लोगों का सम्मान करें’: नागरिकों से उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संदेश

Cuttack: Vice President CP Radhakrishnan pays tributes to Subhas Chandra Bose on his birth anniversary, at Netaji Birth Place Museum, in Cuttack, Odisha, Friday, Jan. 23, 2026. (PTI Photo)(PTI01_23_2026_000070B)

कटक, 23 जनवरी (PTI) – उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सभी लोगों का सम्मान हर भारतीय को करना चाहिए।

बोस के निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि उनका जीवन ‘पराक्रम’ के सच्चे अर्थ को दर्शाता है और यह आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।

उपराष्ट्रपति, जो अपने पहले ओडिशा दौरे पर पहले दिन भुवनेश्वर पहुंचे थे, कटक में बोस के जन्मस्थल पर आयोजित ‘पराक्रम दिवस’ समारोह में शामिल हुए।

ओडिया बाजार में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2021 में बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ घोषित कर उन्हें उचित सम्मान दिया।

राधाकृष्णन ने कहा, “स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के तरीकों में मतभेद हो सकते हैं, विचारों में भिन्नता हो सकती है… लेकिन महान बलिदानों को हर भारतीय द्वारा स्वीकार और सम्मानित किया जाना चाहिए।”

उपराष्ट्रपति ने यह भी स्मरण कराया कि 2018 में भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखा, जिसे उन्होंने भारत के एक महान सपूत को सम्मान देने का कदम बताया।

उन्होंने कहा, “मोदी का निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्र की सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ‘पराक्रम’ की भावना को दर्शाती है, जो साहस और संकल्प की भावना है।”

राधाकृष्णन ने कहा कि नेताजी द्वारा फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना महात्मा गांधी के विरुद्ध नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष का एक अलग दृष्टिकोण थी।

उन्होंने कहा, “जब बोस कटक पहुंचे थे, तो हजारों लोग उन्हें देखने आए थे। उस समय महात्मा गांधी को हर कोई जानता था और वे निर्विवाद नेता थे। उस निर्विवाद नेता से एक ही व्यक्ति ने प्रश्न किया — नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने। इससे उनके महान नेतृत्व का पता चलता है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘पराक्रम’ केवल नेताजी की स्मृति भर नहीं है, बल्कि हर भारतीय के लिए साहस के साथ कार्य करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान है।

उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ बोस का संघर्ष आज भी भारतीयों में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करता है।

उन्होंने कहा, “मेरे हृदय में देशभक्ति की पहली चिंगारी सुभाष चंद्र बोस के जीवन को पढ़ने के बाद जली थी। नेताजी वहां जीवित रहते हैं, जहां साहस भय पर विजय पाता है और जहां कर्तव्य स्वार्थ से ऊपर होता है।”

बाद में X पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति सचिवालय ने कहा, “उन्होंने नागरिकों से नेताजी के एक मजबूत, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत@2047 के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।”

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ उपराष्ट्रपति ने इससे पहले कटक में बोस के जन्मस्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की।

राधाकृष्णन ने कटक में पराक्रम दिवस समारोह के दौरान एक फिलैटेलिक गैलरी और जिला संस्कृति भवन का उद्घाटन किया, साथ ही स्वतंत्रता सेनानी मायाधर मलिक और विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) बी एस सिंह देव को सम्मानित भी किया।

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