नई दिल्ली, 11 नवम्बर (PTI): परेशान भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों ने मंगलवार को संयुक्त बयान जारी करते हुए लीग प्रशासकों से आग्रह किया कि रुके हुए इंडियन सुपर लीग (ISL) सीज़न को तुरंत शुरू किया जाए। खिलाड़ियों का कहना है कि उनका “गुस्सा और निराशा” अब बेक़रारी में बदल चुका है।
यह अपील तब सामने आई जब अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने पिछले हफ्ते कहा कि वाणिज्यिक अधिकारों के लिए जारी प्रस्ताव अनुरोध (RFP) के बाद ISL के लिए कोई बोली प्राप्त नहीं हुई।
स्टार डिफेंडर संदीप झिंगन ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में कहा:“यह अब देरी नहीं बल्कि पूर्ण ठहराव है — कोच, फैंस, स्टाफ और खिलाड़ियों के लिए। हमने बहुत संघर्ष किया है। हमारा सीज़न यूँ ही ख़त्म नहीं हो सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि हर दिन की देरी से भारतीय फुटबॉल को नुकसान हो रहा है।
गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू समेत कई खिलाड़ियों ने लिखित बयान भी साझा किया:“हम सब एकजुट होकर यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें तुरंत खेल शुरू चाहिए। हमारा गुस्सा, निराशा अब खेलने की बेक़रारी में बदल गया है। हम अपने फैंस और परिवार के सामने खेलना चाहते हैं।”
खिलाड़ियों ने प्रशासकों से मौजूदा संकट का समाधान निकालने की अपील की, जिसके चलते मोहन बागान जैसी प्रमुख टीमों ने भी ट्रेनिंग रोक दी है।“हम पेशेवर, तैयार और प्रतिबद्ध हैं। बस हम चाहते हैं कि देश में फुटबॉल फिर से शुरू हो। इस अंधेरी सुरंग में बहुत समय बिताया है — अब हमें कुछ रोशनी चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी बोली मूल्यांकन समिति (न्यायमूर्ति नागेश्वर राव, सेवानिवृत्त) इस मामले पर रिपोर्ट सौंपेगी।
RFP से जुड़े प्रमुख बिंदु
- क्लबों के लिए फ्रेंचाइज़ी फीस 2025-26 से माफ
- वीडियो सपोर्ट सिस्टम और आगे चलकर VAR लागू
- प्रमोशन और रेलिगेशन व्यवस्था 2025-26 से शुरू
- नया वाणिज्यिक भागीदार मैच प्रोडक्शन (कम से कम 11 कैमरे), मार्केटिंग, मीडिया राइट्स और ग्रासरूट निवेश संभालेगा
- निवेश का 70% ISL क्लबों और 30% I-लीग टीमों को
- प्रत्येक क्लब के लिए 18 करोड़ रुपये वेतन सीमा
एक दशक पहले बड़े सपनों के साथ शुरू हुई ISL की मौजूदा स्थिति पर अब सवाल उठ रहे हैं —
क्या लीग व्यावसायिक रूप से टिकाऊ है और क्या AIFF इसे प्रभावी ढंग से बेच पा रहा है?
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