
चंडीगढ़, 30 जून (पीटीआई): औद्योगिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के उद्देश्य से हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) अपने भूमि बैंक मॉड्यूल को डिजिटाइज कर रहा है और इसे इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) के साथ एकीकृत कर रहा है।
सोमवार को यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ई-नीलामी प्रक्रिया और आवंटन के बाद की सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
राज्य “प्लग एंड प्ले” सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके तहत फ्लैटेड फैक्ट्रीज़ की स्थापना प्रमुख स्थानों पर की जा रही है, जैसे कि:
- इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) फरीदाबाद,
- आईएमटी मानेसर फेज-V,
- सोहना,
- खरखौदा,
- करनाल,
- यमुनानगर, और
- साहा।
बयान में कहा गया कि हरियाणा भारत के सबसे व्यवसाय-अनुकूल राज्यों में से एक बनने की दिशा में साहसिक और प्रगतिशील कदम उठा रहा है।
केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में कंप्लायंस रिडक्शन और डि-रेगुलेशन पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग लेने के बाद राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि सरकार नियमों का बोझ कम करने, डि-रेगुलेशन को बढ़ावा देने और व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य ने अनुपालन में कमी लाने के लिए निर्धारित 23 प्राथमिक क्षेत्रों के लिए एक्शन प्लान तैयार किए हैं। इनमें से 15 केंद्रीय सरकार की अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में हैं, जबकि दो क्षेत्रों में कार्यान्वयन शुरू हो चुका है। शेष छह क्षेत्रों पर केंद्र सरकार की टिप्पणियों के अनुसार संशोधन किया जा रहा है।
हरियाणा ने समावेशी और मिश्रित उपयोग योजना को अपनाया है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में रिहायशी, वाणिज्यिक, संस्थागत और सार्वजनिक सेवाओं जैसे अनुकूल उपयोगों की अनुमति दी गई है।
- रेड श्रेणी की इकाइयां केवल औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हो सकती हैं।
- अन्य सभी उद्योग कृषि क्षेत्रों में भी चलाए जा सकते हैं — जो MSME के लिए एक बड़ा लाभ है।
- आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को सड़क श्रेणियों के आधार पर नियमित किया गया है।
- संस्थागत भवन और फ्यूल स्टेशन लगभग सभी क्षेत्रों में अनुमति प्राप्त हैं, सिवाय सार्वजनिक उपयोग और परिवहन क्षेत्रों के।
CLU (Change of Land Use) की प्रक्रिया को भी बेहद सरल कर दिया गया है —
- आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 19 से घटाकर केवल 5 कर दी गई है।
- पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल माध्यम से होती है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।
हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के तहत राज्य ने निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज़ करने के लिए सुधारों को संस्थागत रूप दिया है:
- कम जोखिम वाले औद्योगिक भवनों के लिए स्व-प्रमाणन की अनुमति दी गई है।
- आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने के बाद 8 कार्य दिवसों के भीतर ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते हैं।
- गुणवत्ता सुनिश्चित करने और विवाद समाधान के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसियां और फैक्ट-फाइंडिंग प्रणाली भी लागू की गई हैं।
पर्यावरण मोर्चे पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) अब 30 कैलेंडर दिनों (यानी 21 कार्य दिवसों) के भीतर स्वीकृति निर्णय देता है — जो राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
- राज्य ने पहले से ही सफेद श्रेणी के उद्योगों को किसी भी अनुमति से मुक्त कर दिया है।
- निरीक्षण के समय कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं मांगे जाते।
- सभी फॉर्मेट और चेकलिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य अब जन विश्वास अधिनियम की भावना के अनुरूप राज्य स्तरीय कानून लाने की योजना बना रहा है, ताकि छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सके और विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा मिल सके।
इसके अलावा, राज्य अपने इंवेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो सिस्टम को भी पूरी तरह से नया स्वरूप दे रहा है और इसे नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) के साथ एकीकृत करेगा, जिससे निवेशकों के लिए प्रक्रिया और आसान हो जाएगी।
इस बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त और सचिव अमित कुमार अग्रवाल तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
पीटीआई एसयूएन एचवीए
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