
चंडीगढ़, 13 मार्च (पीटीआई) — Nayab Singh Saini ने शुक्रवार को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित टाउन पार्क में तीन दिवसीय 38वें ‘वसंत उत्सव’ का उद्घाटन किया।
अपने 37 साल के इतिहास में पहली बार इस कार्यक्रम का आयोजन Surajkund Mela की तर्ज पर किया जा रहा है। समारोह के दौरान स्थानीय कैक्टस गार्डन को भी करीब एक साल तक रखरखाव के लिए बंद रहने के बाद आम लोगों के लिए फिर से खोल दिया गया।
मुख्यमंत्री सैनी ने फूलों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया, जिसमें कट, सूखे और ताजे फूलों की विभिन्न श्रेणियां शामिल थीं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के स्टॉल भी देखे।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव संस्कृति और प्रकृति का उत्सव है और पूरे राज्य के लोगों के लिए बड़ा आकर्षण बन गया है। उन्होंने कहा कि पंचकूला एक सुव्यवस्थित शहर है, जो अपने पर्यावरण और योजनाबद्ध विकास के लिए जाना जाता है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम में युवाओं की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए फ्लोरल डेकोरेशन, कट फ्लावर डिस्प्ले, रंगोली, पेंटिंग, पॉट पेंटिंग, फेस पेंटिंग, टैटू मेकिंग, पर्यावरण क्विज, मेहंदी और फैंसी-ड्रेस प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति मौसमी बदलावों से गहराई से जुड़ी हुई है और यह उत्सव इस बात की याद दिलाता है कि बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो प्रगति की ओर ले जाती है।
पर्यावरण से जुड़ी पहलें
वैश्विक तापमान वृद्धि जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हरित क्षेत्र बढ़ाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और जैव विविधता की रक्षा के लिए कई पहल कर रही है।
प्राण वायु देवता पेंशन योजना के तहत 75 साल से अधिक पुराने पेड़ों की देखभाल के लिए 3,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जाती है। अब तक 3,819 पेड़ों की पहचान की जा चुकी है और उनके संरक्षकों को 2 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा इस योजना के तहत 1,541 और पेड़ों की पहचान की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में 20 ‘ऑक्सीवन’ स्थापित किए गए हैं, जहां 5 से 100 एकड़ भूमि पर पेड़ लगाए जाते हैं। पंचकूला के बिर घग्घर क्षेत्र और करनाल में ओल्ड बादशाही नहर के किनारे दुर्लभ और औषधीय पौधों के रोपण का कार्य चल रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संरक्षण को पर्यटन और विकास से जोड़ने पर भी काम कर रही है। इसके तहत गुरुग्राम के अरावली क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा जंगल सफारी विकसित करने की योजना है।
2026-27 के राज्य बजट का उल्लेख करते हुए सैनी ने कहा कि हरियाणा राज्य एग्रो-फॉरेस्ट्री नीति लागू की जाएगी, जिससे प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और पेड़ों की संख्या बढ़ेगी। अन्य पहलों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और ‘पवित्र उपवन’ (सेक्रेड ग्रोव्स) की अधिसूचना शामिल है।
इसके अलावा करनाल जिले के हसनपुर गांव में 100 एकड़ वन भूमि पर 50 करोड़ रुपये की लागत से एक डियर पार्क भी विकसित किया जाएगा।
(पीटीआई) SUN AKY
