हर युवा की भविष्य गढ़ने में भूमिका है: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 25, 2025, Vice President CP Radhakrishnan addresses during the Good Governance Day celebrations on the birth anniversary of former prime minister Atal Bihari Vajpayee, in New Delhi. (@VPIndia/X via PTI Photo)(PTI12_25_2025_000501B) *** Local Caption ***

चेन्नई, 2 जनवरी (पीटीआई): उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि अगले दो दशकों में विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं की भागीदारी आवश्यक होगी।

यहां डॉ. एम. जी. आर. एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “हर युवा की भविष्य को आकार देने में भूमिका है। आपको राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देना होगा।”

उन्होंने छात्रों से आजीवन सीखने की भावना अपनाने और देश की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित शिक्षा भारत के विकास के लिए अनिवार्य है।

“सफलता के लिए शॉर्टकट भले ही कुछ समय के लिए आकर्षक और सफल दिखें, लेकिन वे भ्रामक होते हैं। ऐसे शॉर्टकट अंततः बड़े पतन का कारण बनते हैं। इसलिए आपका हर प्रयास धर्म और अनुशासन पर आधारित होना चाहिए,” राधाकृष्णन ने कहा।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा, “दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जो अधिक जिम्मेदारियां और अवसर लेकर आता है।” उन्होंने विश्वास जताया कि छात्र “पेशेवर दक्षता, करुणा और प्रतिबद्धता” के साथ समाज की सेवा करेंगे।

तमिलनाडु की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह राज्य लंबे समय से शिक्षा और समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है।

“इन्हीं तटों से व्यापारी कभी भारत के विचार, नैतिकता और संस्कृति को समुद्र पार ले जाया करते थे। यह हमारे सभ्यतागत आत्मविश्वास और सीखने व आदान-प्रदान की खुली परंपरा को दर्शाता है,” उन्होंने कहा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों से हो रहे तेज बदलावों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये प्रगति हर क्षेत्र को नया रूप दे रही है। उन्होंने छात्रों को निरंतर कौशल विकास और अनुकूलनशीलता अपनाने की सलाह दी।

“आपको लगातार अपने कौशल को निखारना होगा, आजीवन सीखने की मानसिकता अपनानी होगी और नई तकनीकों से जुड़ना होगा — चाहे वे आपके चुने हुए विषय से बाहर ही क्यों न हों,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार मजबूत नैतिक मूल्यों पर होना चाहिए।

“सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईमानदारी, सहानुभूति और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने से जुड़ी है,” उन्होंने कहा।

कैंपस से बाहर के जीवन पर छात्रों को सलाह देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सफलता और असफलता मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

“दोनों का सामना संतुलन, धैर्य और मानसिक मजबूती के साथ करें। शॉर्टकट और दूसरों से तुलना से बचें। स्पष्ट लक्ष्य तय करें, निरंतर आगे बढ़ें और अपनी विशिष्ट क्षमताओं पर विश्वास रखें,” उन्होंने कहा।

इस अवसर पर तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमणियन ने कहा कि 76 मेडिकल कॉलेजों के साथ तमिलनाडु देश में सबसे अधिक मेडिकल कॉलेजों वाला राज्य है।

उन्होंने बताया, “तमिलनाडु में 36 सरकारी मेडिकल कॉलेज, एक ईएसआई मेडिकल कॉलेज, 22 स्ववित्तपोषित कॉलेज, 12 डीम्ड विश्वविद्यालय और पांच निजी मेडिकल कॉलेज हैं।”

उनके अनुसार, राज्य से हर वर्ष 12,550 एमबीबीएस और 2,200 बीडीएस स्नातक निकलते हैं।

“इन दोनों चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए कुल 14,750 सीटों के साथ तमिलनाडु देश में अग्रणी राज्य है,” उन्होंने कहा।

इस मौके पर डॉ. एम. जी. आर. एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के चांसलर डॉ. ए. सी. शनमुगम, फैकल्टी सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।