
कीव, 22 दिसंबर (एपी): पैरों के नीचे जमी हुई जमीन की चरमराहट के बीच, यूक्रेन की एक विशिष्ट ड्रोन-शिकार टीम के सदस्य लंबी रात के लिए तैयारी कर रहे हैं।
हल्के स्टैंड पर एंटेना और सेंसर लगाए जाते हैं। हार्ड केस से मॉनिटर और नियंत्रण उपकरण निकाले जाते हैं, और एक गेम-चेंजिंग नया हथियार तैनाती के लिए तैयार किया जाता है।
उड़ते हुए थर्मस जैसी आकृति वाला ‘स्टिंग’ यूक्रेन के नए स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोन में से एक है।
इस इकाई के कमांडर का कहना है कि ये इंटरसेप्टर रूस के तेजी से विकसित हो रहे आत्मघाती ड्रोन का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं, जो अब पहले से अधिक तेज और ऊंची उड़ान भर रहे हैं।
यूक्रेनी सैन्य प्रोटोकॉल के अनुरूप केवल कॉल साइन “लॉई” के नाम से पहचाने जाने वाले अधिकारी ने कहा, “हर नष्ट किया गया लक्ष्य वह है जो हमारे घरों, हमारे परिवारों और हमारे बिजली संयंत्रों तक नहीं पहुंच पाया। दुश्मन सोता नहीं है और न ही हम।”
यूक्रेनी शहरों और ऊर्जा अवसंरचना पर रात-दर-रात होने वाले हमलों ने कीव को हवाई रक्षा के नियम दोबारा लिखने और महज 1,000 डॉलर तक की लागत वाले सस्ते ड्रोन-विध्वंसक विकसित करने के लिए मजबूर किया है।
2025 में महज कुछ महीनों में ये इंटरसेप्टर प्रोटोटाइप से बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंच गए और आधुनिक युद्ध में ताजा बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यूक्रेन में प्रभावी रक्षा महंगे और धीरे-धीरे बदले जाने वाले हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय बड़े पैमाने पर उत्पादन, तेजी से अनुकूलन और कम लागत वाले प्रणालियों को मौजूदा सुरक्षा ढांचे में परतों के रूप में जोड़ने पर निर्भर करती है।
स्वयंसेवकों द्वारा संचालित स्टार्टअप ‘वाइल्ड हॉर्नेट्स’ द्वारा बनाए गए ‘स्टिंग’ जैसे मॉडल और हाल ही में सामने आए ‘बुलेट’ दुश्मन ड्रोन से टकराने से पहले तेज गति पकड़ सकते हैं। इन्हें मॉनिटर देखते हुए या फर्स्ट-पर्सन-व्यू गॉगल्स पहनकर पायलट उड़ाते हैं।
इसमें अर्थशास्त्र अहम है। ‘बुलेट’ विकसित करने वाले तेजी से बढ़ते स्टार्टअप ‘जनरल चेरी’ की रणनीतिक परिषद के सदस्य एंड्री लावरेनोविच कहते हैं कि जिन ड्रोन को ये नष्ट करते हैं, उनकी कीमत 10,000 से 3,00,000 डॉलर तक होती है।
उन्होंने कहा, “हम गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।”
रूस ईरान में डिजाइन किए गए ‘शाहेद’ आत्मघाती ड्रोन को प्राथमिकता देता है और उसने त्रिकोणीय पंखों वाले इस ड्रोन के कई संस्करण तैयार किए हैं, जिनमें जैमर, कैमरे और टर्बोजेट इंजन लगे हैं—यह सब नवाचार की निरंतर होड़ का हिस्सा है।
लावरेनोविच ने कहा, “कुछ क्षेत्रों में वे एक कदम आगे हैं। अन्य में हम कोई नवाचारी समाधान लेकर आते हैं और उन्हें उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।”
वॉशिंगटन स्थित ‘सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस’ के रक्षा विश्लेषक फेडेरिको बोर्सारी कहते हैं कि इंटरसेप्टर यूक्रेन—और यूरोप—के एंटी-ड्रोन शस्त्रागार में एक महत्वपूर्ण जोड़ हैं।
उन्होंने कहा, “सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन इतनी तेजी से और इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं कि इन्हें आधुनिक काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स की आधारशिला माना जा सकता है। ये हवाई रक्षा की लागत और पैमाने के समीकरण को पुनर्संतुलित करते हैं।”
हालांकि उनकी गतिशीलता और कम लागत अधिक लक्ष्यों की रक्षा संभव बनाती है, बोर्सारी ने चेताया, “इन्हें कोई चमत्कारी समाधान मानना गलती होगी।” उनके अनुसार, इनकी सफलता सेंसर, तेज कमांड और कंट्रोल तथा कुशल ऑपरेटरों पर निर्भर करती है। इन्हें विकल्पों की एक श्रृंखला में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसकी शुरुआत कई मिलियन डॉलर की मिसाइलों से होकर जाल और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों तक जाती है।
यूक्रेन और नाटो के रक्षा योजनाकारों को उम्मीद है कि 2026 में संघर्ष के दोनों पक्षों में ड्रोन उत्पादन का तीव्र विस्तार जारी रहेगा, जिससे यूरोप की “ड्रोन वॉल” नामक परतदार हवाई रक्षा प्रणाली बनाने की योजनाओं को और तात्कालिकता मिलेगी। यूरोप की पूर्वी सीमाओं के साथ दो वर्षों में लागू होने वाला यह नेटवर्क ड्रोन का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और इंटरसेप्ट करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें यूक्रेनी शैली के इंटरसेप्टर संभावित रूप से केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
यूक्रेनी ड्रोन निर्माता अगले साल अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों के साथ सह-उत्पादन का विस्तार करने जा रहे हैं। युद्ध में परखे गए डिजाइनों और मूल्यवान डेटा को पश्चिमी पैमाने और फंडिंग के साथ जोड़कर यह सहयोग उत्पादन बढ़ाएगा और यूक्रेन को नाटो सदस्य देशों की आपूर्ति शृंखलाओं में शामिल करेगा।
लावरेनोविच के मुताबिक, एक और अपरिहार्य रुझान बढ़ती स्वचालन का है।
उन्होंने कहा, “हमारे मोबाइल समूहों को अग्रिम मोर्चे के पास जाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, जहां वे खुद लक्ष्य बन जाते हैं।”
“ड्रोन को पूरी तरह स्वायत्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले रोबोट बनना होगा—भले ही यह सुनने में डरावना लगे—ताकि हमारे सैनिक जीवित रह सकें।”
