शिमला, 5 फरवरी (भाषा)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को हरित ऊर्जा केंद्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू की उपस्थिति में जियोट्रॉपी इंडिया के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और भारत में आइसलैंड के राजदूत बेनेडिक्ट होस्कल्डसन भी उपस्थित थे।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से ऊर्जा निदेशालय के मुख्य अभियंता डी. पी. गुप्ता और आइसलैंड स्थित जियोट्रोपी के अध्यक्ष टोमोस ओटो हैंसन ने हस्ताक्षर किए।
सतत ऊर्जा के लिए राज्य सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, सुखू ने कहा कि सरकार हिमाचल प्रदेश में हरित ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। भू-तापीय ऊर्जा ऐसा ही एक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।
उन्होंने कहा कि राज्य में महत्वपूर्ण भू-तापीय क्षमता है, जिसका उपयोग पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि भू-तापीय ऊर्जा का एक प्रमुख लाभ इसकी चौबीसों घंटे उपलब्धता है।
मुख्यमंत्री ने कंपनी को तुरंत खोज कार्य शुरू करने का निर्देश दिया ताकि राज्य की भू-तापीय क्षमता का जल्द से जल्द दोहन किया जा सके।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि इस खोज से राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। पीटीआई कोर बाल बाल
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