नई दिल्ली, 19 जुलाई (PTI) — दिल्ली के लोग उन इलाकों में पैदल चलने को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं जहां फुटपाथ पर ठेले/विक्रेता, पुलिस की उपस्थिति, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होती है। फिर भी, राजधानी में पैदल चलने वालों के लिए माहौल बहुत हद तक प्रतिकूल और असुरक्षित है। यह बात IIT दिल्ली और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन में सामने आई है।
यह अध्ययन IIT दिल्ली के ‘परिवहन अनुसंधान और चोट निवारण केंद्र’ और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के सहयोग से किया गया था। इसमें सुझाव दिए गए हैं कि:
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पैदल पथों से अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाया जाए,
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ठेलेवालों के लिए अलग और नियोजित ज़ोन बनाए जाएं,
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बस स्टॉप के पास क्रॉसिंग की सुविधा जोड़ी जाए,
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सड़क प्रकाश व्यवस्था बेहतर की जाए,
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और सुरक्षा हेतु CCTV कवरेज बढ़ाया जाए।
अध्ययन से जुड़े प्रमुख आंकड़े और निष्कर्ष:
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दक्षिणी दिल्ली के 8 पालिकाओं के अंतर्गत 426 पैदल यात्रियों से 2022 में सर्वेक्षण किया गया था। इसमें मेट्रो स्टेशनों, बस स्टॉप और बाजारों के आसपास के इलाकों को शामिल किया गया।
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15 पैदल यात्री माहौल संबंधित स्थितियों में से 12 को असुरक्षित बताया गया। इनमें शामिल हैं:
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तेज रफ्तार और भारी वाहन ट्रैफिक
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बस स्टॉप के पास क्रॉसिंग की कमी
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फुटपाथ और क्रॉसिंग पर खड़े वाहन
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पैदल पथ पर टू-व्हीलर और कारें
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गार्डरेल की अनुपस्थिति
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खराब या अपर्याप्त लाइटिंग
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सीसीटीवी और पुलिस की अनुपस्थिति
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सूर्यास्त के बाद पैदल चलने में डर
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केवल तीन स्थितियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया:
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सड़क के बीच का विभाजक (मीडियन)
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ऊँचे फुटपाथ
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और फुटपाथ पर लगे ठेले/विक्रेताओं की उपस्थिति
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अध्ययन के सह-लेखक एवं IIT दिल्ली की प्रोफेसर गीता तिवारी ने बताया:
“कई स्थानों पर फुटपाथ या तो हैं ही नहीं, और अगर हैं तो वे चलने योग्य नहीं हैं। उनकी सतह असमान है, ऊँचाई गलत है, और कई स्थानों पर सड़क के काम के दौरान या तो हटा दिए गए हैं या अवरुद्ध कर दिए गए हैं।”
उन्होंने ये भी जोड़ा कि जहां प्रधानमंत्री विक्रेताओं की मौजूदगी होती है, उन स्थानों पर लोगों को अधिक सुरक्षा और गतिविधि का अनुभव होता है।
अध्ययन के अनुसार, 15 में से सबसे सुरक्षित माहौल माना गया सड़क के किनारे लगे दुकानदारों की उपस्थिति। इसके बाद पुलिस की उपस्थिति और CCTV निगरानी भी नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है।
अध्ययन में यह पाया गया कि लोग समतल/रोके गए फुटपाथ को ऊँचे फुटपाथ के मुकाबले ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को ऊँचे फुटपाथ अधिक सुरक्षित लगते हैं।
फुट-ओवरब्रिज पर राय
हालाँकि कुछ स्थानों पर फुट-ओवरब्रिज बने हैं, लेकिन अधिकतर पैदल यात्री उन्हें उपयोग में नहीं लाना चाहते। वृद्ध और सामान लिए चल रहे लोग इन्हें थकाने वाले और असुविधाजनक मानते हैं।
“फुट-ओवरब्रिज अधिकतर लोगों के लिए उपयोगी समाधान नहीं हैं। बड़े शहरों में भी लोग इन्हें टालते हैं,” तिवारी ने कहा।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि 2022 में दिल्ली में हुए 1,461 सड़क हादसों में 43% मौतें पैदल यात्रियों की हुईं, जबकि राजधानी में 26% दैनिक यात्राएं पैदल की जाती हैं।
दिल्ली बनाम लंदन तुलना
अध्ययन में दिल्ली की तुलना सेंट्रल लंदन से भी की गई, जहां पैदल मार्ग, क्रॉसिंग, और ट्रैफिक नियंत्रण कोई बड़ी समस्या नहीं रही। लेकिन दोनों शहरों में तेज़ ट्रैफिक के चलते सड़क पार करने में असहजता महसूस की गई।
हालांकि, दिल्ली में प्रकाश व्यवस्था की कमी, अपराध का डर और यौन उत्पीड़न जैसी चिंताएं लंदन की तुलना में कहीं अधिक तीव्र दिखाई दी।
महिलाओं ने यह महसूस किया कि फुटपाथ पर खड़ी गाड़ियों या गार्डरेल की कमी के कारण उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक असुरक्षितता लगती है।
वहीं, 60 साल से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को तेज रफ्तार ट्रैफिक की गंभीरता का आभास नहीं हो पाता, शायद उनकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने के कारण।
यह अध्ययन जुलाई 2025 के ‘अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक और सुरक्षा विज्ञान पत्रिका’ में प्रकाशित हुआ है। इसके लेखक हैं – IIT दिल्ली की पीएचडी शोधकर्ता नेबा सी टोनी, प्रोफेसर गीता तिवारी, टाकु फुजियामा, एम. मनोज और नीलाद्री चटर्जी।
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