प्रयागराज, 19 नवम्बर (PTI) इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1996 के मोदीनगर-गाज़ियाबाद बस बम विस्फोट मामले में मोहम्मद इलियास की दोषसिद्धि को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा।
जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने दोषसिद्धि रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में “बुरी तरह विफल” रहा है।
पीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किया गया आरोपी का कथित इकबालिया बयान साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के तहत स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने 10 नवम्बर के आदेश में कहा कि वह “भारी मन” से बरी करने का आदेश दे रही है क्योंकि यह “आतंकी” घटना समाज की चेतना को झकझोर देने वाली थी, जिसमें 18 लोगों की मौत हुई थी।
अदालत ने कहा, “अभियोजन इस बात को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा कि अपीलकर्ता ने सह-आरोपी के साथ मिलकर बस में बम लगाने की साजिश रची, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, कई घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ। इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज दोषसिद्धि और दी गई सजा रद्द की जाती है।”
अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उस ऑडियो कैसेट पर भरोसा करके “बड़ी कानूनी भूल” की, जिसमें पुलिस की मौजूदगी में आरोपी का इकबालिया बयान रिकॉर्ड बताया गया था।
पीठ ने कहा, “यदि इस साक्ष्य को अलग कर दिया जाए, तो आरोप के समर्थन में अपीलकर्ता के खिलाफ बिल्कुल भी प्रमाण नहीं बचता।”
अदालत ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता और सह-आरोपी के खिलाफ किए गए कथित अदालत-बाह्य (extrajudicial) इकबालिया बयान के गवाह मुकदमे के दौरान hostile हो गए और उन्होंने अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया आरोपी इलियास का ऑडियो रिकॉर्डेड कथित इकबालिया बयान कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने कहा, “साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 25 के अनुसार पुलिस अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह इकबालिया बयान सिद्ध नहीं किया जा सकता।”
धारा 25 यह प्रावधान करती है कि पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया कोई भी इकबालिया बयान अभियुक्त के खिलाफ प्रमाण के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा।
27 अप्रैल 1996 को दिल्ली से लगभग 53 यात्रियों के साथ शाम 3.55 बजे एक बस रवाना हुई थी। रास्ते में 14 और यात्री बस में चढ़े।
शाम करीब 5 बजे, मोदीनगर थाने को पार करने के तुरंत बाद बस के आगे के हिस्से में शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिससे 10 लोगों की मौके पर मृत्यु हो गई और 48 यात्री घायल हुए।
फॉरेंसिक जांच में पता चला कि ड्राइवर की सीट के नीचे कार्बन के साथ मिला हुआ आरडीएक्स रखा गया था और विस्फोट रिमोट स्विच से किया गया था।
अभियोजन के अनुसार यह हमला पाकिस्तानी नागरिक और हरकत-उल-अंसार के कथित जिला कमांडर अब्दुल मतीन उर्फ इकबाल ने मोहम्मद इलियास और तसलीम के साथ मिलकर अंजाम दिया था।
आरोप यह भी था कि इलियास को जम्मू-कश्मीर में ब्रेनवॉश किया गया था।
2013 में ट्रायल कोर्ट ने तसलीम को बरी कर दिया था, लेकिन इलियास और अब्दुल मतीन को आईपीसी और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की कई धाराओं के तहत दोषी करार दिया था।
दोनों को आजीवन कारावास सहित विभिन्न कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।
तसलीम की बरी के खिलाफ राज्य सरकार ने कोई अपील दायर नहीं की और यह भी जानकारी नहीं है कि अब्दुल मतीन ने अपील दायर की थी या नहीं।
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