2004 के धोखाधड़ी मामले में फरार ‘इंजीनियर’ यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार

नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली पुलिस ने 2004 के एक पुराने धोखाधड़ी मामले में 63 वर्षीय एक कथित ‘इंजीनियर’ को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अखबारों में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी राजेश राजपूत, जो सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है, 2000 के दशक की शुरुआत में कुछ ठगों के संपर्क में आया और ‘हेल्पलाइन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से फर्जी कंसल्टेंसी कंपनी चलाने लगा।

यह गिरोह राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन देकर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का दावा करता था और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा के अनुसार, राजपूत को 2004 के धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में जमानत मिलने के बाद अदालत में पेश नहीं होने पर 2006 में भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।

गिरोह ने एनजीओ जैसे फ्रंट के जरिए भोले-भाले माता-पिता को फंसाया, जो अपने बच्चों के लिए एडमिशन चाहते थे।

राजपूत और उसके साथियों ने ओडिशा के एक डॉक्टर से उसके बेटे को मैनेजमेंट कोटा से एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपये ठगे थे।

इस धोखाधड़ी के मामले में शालीमार बाग थाने में आईपीसी की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज हुआ था, जिसे बाद में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर कर दिया गया।

जमानत मिलने के बाद राजपूत अदालत में पेश होना बंद कर दिया था, जिसके चलते फरवरी 2006 में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

लंबी तलाश के बाद पुलिस टीम सहारनपुर पहुंची और 1 जुलाई की सुबह उसके घर पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

स्थानीय लोगों के सहयोग न करने के बावजूद पुलिस ने आरोपी को ढूंढ निकाला। शुरू में राजपूत ने अपनी पहचान छुपाई, लेकिन दिल्ली क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के दौरान उसने सब कुछ स्वीकार कर लिया।

उसकी पहचान शालीमार बाग थाने और EOW के रिकॉर्ड से पुष्ट की गई। उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(d) के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है।

डीसीपी इंदोरा ने बताया कि गिरोह ने इसी तरीके से कई लोगों को ठगा है। अन्य पीड़ितों और बाकी सदस्यों की तलाश जारी है।