
नई दिल्ली, 13 फरवरी (पीटीआई) — 2016 से अब तक भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को कार्यरत न्यायाधीशों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। यह जानकारी शुक्रवार को लोकसभा में दी गई।
लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि 2016 से 2025 के बीच कार्यरत न्यायाधीशों के खिलाफ कुल 8,639 शिकायतें प्राप्त हुईं। वर्ष 2024 में सबसे अधिक 1,170 शिकायतें मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को मिलीं।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों का निपटारा न्यायपालिका द्वारा “इन-हाउस तंत्र” के माध्यम से किया जाता है।
मेघवाल ने याद दिलाया कि मई 1997 में उच्चतम न्यायालय ने दो प्रस्ताव स्वीकार किए थे — “न्यायिक जीवन के मूल्यों का पुनर्वक्तव्य”, जिसमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा पालन किए जाने वाले न्यायिक मानक और सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं; तथा “इन-हाउस प्रक्रिया”, जिसके तहत उन न्यायाधीशों के खिलाफ उपयुक्त सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं जो न्यायिक जीवन के सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मूल्यों का पालन नहीं करते।
स्थापित इन-हाउस प्रक्रिया के अनुसार, उच्चतर न्यायपालिका से संबंधित शिकायतें प्राप्त करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश सक्षम प्राधिकारी होते हैं, विशेषकर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ।
इसी प्रकार, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश संबंधित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के आचरण के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने के लिए सक्षम होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्चतर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त शिकायतों को संबंधित मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों को भेज दिया जाता है, जो ऐसी शिकायतों पर विचार करने के लिए सक्षम होते हैं।
