नई दिल्ली, 30 सितंबर (पीटीआई) देश में वर्ष 2023 के दौरान कुल 1,71,418 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो 2022 की तुलना में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्याओं के प्रमुख कारण पारिवारिक समस्याएं और बीमारियां रहे।
सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र (22,687) में दर्ज हुईं, इसके बाद तमिलनाडु में 19,483, मध्य प्रदेश में 15,662, कर्नाटक में 13,330 और पश्चिम बंगाल में 12,819 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। ये क्रमशः कुल आत्महत्याओं का 13.2 प्रतिशत, 11.4 प्रतिशत, 9.1 प्रतिशत, 7.8 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत हिस्सा हैं।
एनसीआरबी रिपोर्ट में कहा गया है कि ये पांच राज्य मिलकर देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं का 49 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि शेष 51 प्रतिशत आत्महत्याएं बाकी 23 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज हुईं।
देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश (देश की 17 प्रतिशत जनसंख्या) ने तुलनात्मक रूप से कम आत्महत्याएं दर्ज कीं, जो केवल 5.3 प्रतिशत रहीं।
पारिवारिक समस्याएं और बीमारी आत्महत्याओं के प्रमुख कारण रहे, जिन्होंने क्रमशः 31.9 प्रतिशत और 19 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। अन्य कारणों में मादक द्रव्यों/शराब की लत (7 प्रतिशत), विवाह से जुड़े मुद्दे (5.3 प्रतिशत), प्रेम संबंध (4.7 प्रतिशत), दिवालियापन या कर्ज (3.8 प्रतिशत), बेरोजगारी (1.8 प्रतिशत), परीक्षा में असफलता (1.4 प्रतिशत), किसी प्रियजन की मृत्यु (1.3 प्रतिशत), पेशेवर/कैरियर समस्या (1.1 प्रतिशत) और संपत्ति विवाद (1 प्रतिशत) शामिल रहे।
महिला पीड़ितों में से 51.6 प्रतिशत (46,648 में से 24,048) गृहिणियां थीं, जो कुल आत्महत्याओं का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा हैं। सरकारी सेवकों ने 1.1 प्रतिशत (1,915) जबकि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों ने 7.2 प्रतिशत (12,275) आत्महत्याओं का हिस्सा बनाया। सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों का हिस्सा 1.4 प्रतिशत (2,327 आत्महत्याएं) रहा।
विवाह से जुड़े मुद्दों (विशेषकर दहेज संबंधी मामलों) और नपुंसकता/बांझपन के मामलों में महिला पीड़ितों का अनुपात अधिक रहा। 18–30 वर्ष और 30–45 वर्ष की आयु समूह आत्महत्याओं के लिए सबसे संवेदनशील रहे। इन आयु समूहों ने क्रमशः 32.8 प्रतिशत और 32.5 प्रतिशत आत्महत्याओं का योगदान दिया।
बच्चों (18 वर्ष से कम आयु) में आत्महत्याओं के प्रमुख कारण पारिवारिक समस्याएं (2,568), प्रेम संबंध (1,724) और परीक्षा में असफलता (1,303) रहे। छात्र और बेरोजगार पीड़ित कुल का 8.1 प्रतिशत (13,892) रहे।
दिल्ली, जो सबसे अधिक जनसंख्या वाला केंद्र शासित प्रदेश है, ने आत्महत्याओं की सबसे अधिक संख्या (3,131) दर्ज की, इसके बाद पुडुचेरी (465) का स्थान रहा।
देश के 53 महानगरों में 2023 के दौरान कुल 26,095 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2023 में 2022 की तुलना में आत्महत्याओं में सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप (50 प्रतिशत), लद्दाख (46.2 प्रतिशत), बिहार (31.9 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (27 प्रतिशत), अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (17 प्रतिशत), उत्तराखंड (15.5 प्रतिशत), चंडीगढ़ (14.5 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (13 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (12 प्रतिशत) रहे। वहीं, आत्महत्याओं में सर्वाधिक कमी मिजोरम (35.9 प्रतिशत), नागालैंड (26.5 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (14.1 प्रतिशत) में रही।
एनसीआरबी ने कहा कि आत्महत्या दर यानी प्रति एक लाख आबादी पर आत्महत्याओं की संख्या को तुलना के लिए एक मानक पैमाना माना जाता है।
2023 में पूरे भारत की आत्महत्या दर 12.3 रही। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में आत्महत्या दर सबसे अधिक (49.6) रही, इसके बाद सिक्किम (40.2), केरल (30.6), पुडुचेरी (28.0) और तेलंगाना (27.7) का स्थान रहा। पीटीआई एसीबी जेडएमएन
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